​आगरा हत्याकांड: धमकी की शिकायत पर चुप्पी भारी पड़ी, प्रदीप मिश्रा की हत्या के बाद जैतपुर पुलिस पर उठे गंभीर सवाल

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आगरा। जनपद के जैतपुर थाना क्षेत्र के रूपपुरा गांव में हुई प्रदीप मिश्रा की जघन्य हत्या ने आगरा पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 18 जून को मंदिर में आरती के दौरान हुई इस वारदात के बाद से ही पुलिस की संवेदनहीनता और लापरवाही के किस्से चर्चाओं में हैं। परिजनों का दर्दनाक आरोप है कि प्रदीप की हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पुलिस की अनदेखी का नतीजा है, क्योंकि घटना से आठ दिन पहले ही उन्होंने जान का खतरा बताते हुए थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन थाना पुलिस ने उस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

परिजनों का आरोप: ‘दरोगा ने नहीं की कोई कार्रवाई’

परिजनों का कहना है कि यदि शिकायत को गंभीरता से लिया जाता तो संभवतः इस वारदात को टाला जा सकता था। मामले में एक दरोगा को निलंबित कर दिया गया है, जबकि तत्कालीन थानाध्यक्ष की भूमिका की विभागीय जांच कराई जा रही है। हालांकि सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या केवल निलंबन की कार्रवाई से ऐसी लापरवाही पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा।

18 जून को मंदिर में आरती के दौरान हुई थी हत्या

18 जून को जैतपुर थाना क्षेत्र के रूपपुरा गांव निवासी प्रदीप मिश्रा की संतोषी माता मंदिर में आरती के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के भाई अवधेश मिश्रा ने गांव के कन्हैयालाल पाराशर, उनके पुत्र सोमेश पाराशर, जैतपुर निवासी श्याम नौपुत्रा और सत्यम पुरोहित के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था।

प्रदीप मिश्रा की अंत्येष्टि के दौरान परिजनों ने डीसीपी पूर्वी अभिषेक अग्रवाल से शिकायत करते हुए बताया कि हत्या से आठ दिन पहले प्रदीप मिश्रा स्वयं जैतपुर थाने पहुंचे थे। उन्होंने लिखित तहरीर देकर आरोप लगाया था कि नामजद लोग उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और उनकी जान को खतरा है। आरोप है कि दरोगा और थानाध्यक्ष ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें बिना किसी प्रभावी कार्रवाई के वापस भेज दिया। परिजनों का कहना है कि इसी लापरवाही के कारण आरोपियों के हौसले बढ़े और उन्होंने हत्या की वारदात को अंजाम दे दिया।

डीसीपी पूर्वी अभिषेक अग्रवाल द्वारा कराई गई जांच में दरोगा प्रवेश दुबे की लापरवाही सामने आने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है। साथ ही तत्कालीन थानाध्यक्ष की भूमिका की भी विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

थाना क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि निलंबित किए गए दरोगा के सामने कुछ दिन पहले इसी हत्याकांड के एक आरोपी पर कुछ लोगों के साथ मारपीट करने का आरोप भी आया था, लेकिन उस मामले में भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई थी। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सुरक्षा पर भी सवाल, सुरक्षाकर्मी ड्यूटी से नदारद

हत्या के बाद अधिकारियों द्वारा मृतक के परिवार को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। परिजनों का आरोप है कि सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात दरोगा मुकेश शुक्ला को 19 जून की शाम सात बजे से ड्यूटी संभालनी थी, लेकिन वह रात करीब 11:30 बजे पहुंचे और तड़के लगभग 2:30 बजे वापस चले गए। परिजनों का कहना है कि इस दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था लगभग रामभरोसे रही। इस मामले में फिलहाल संबंधित अधिकारी के विरुद्ध किसी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

थाने में तमंचे से फायर कराने की चर्चा भी बनी चर्चा का विषय

बाह सर्किल के एक थाने से जुड़ा एक अन्य मामला भी इन दिनों पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस महकमे में चर्चा है कि एक थानाध्यक्ष ने बरामद तमंचे की कार्यशीलता जांचने के लिए थाने की बाउंड्री के पीछे उससे फायर करा दिया। इस पर कुछ पुलिसकर्मियों ने भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह का परीक्षण नियमानुसार निर्धारित सुरक्षित स्थान पर होना चाहिए था। विभाग में यह भी चर्चा है कि तमंचे से फायर इसलिए कराया गया ताकि फॉरेंसिक परीक्षण के दौरान यह प्रमाणित हो सके कि उससे गोली चली है। हालांकि इस पूरे मामले पर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने नहीं आई है।

प्रदीप मिश्रा हत्याकांड और उससे जुड़े घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि जान से मारने की शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो, तो क्या कई गंभीर आपराधिक घटनाओं को रोका जा सकता है। अब सभी की निगाहें विभागीय जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।.

-साभार औरगुरु डॉट कॉम

Dr. Bhanu Pratap Singh