लखनऊ। पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक विपक्षी दलों में मची भगदड़ और टूट को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है।
केशव मौर्य ने विपक्षी नेताओं के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें भाजपा पर विपक्षी दलों को तोड़ने का दावा किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा पर दोष मढ़ना विपक्ष की अपनी विफलता और संगठनात्मक कमजोरी को छुपाने का एक “सुविधाजनक बहाना” मात्र है।
”परिवारवाद और अंधकारमय भविष्य से परेशान हैं नेता”
केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी बात रखते हुए कहा कि विपक्षी दलों के सांसद और विधायक अब ‘परिवारवादी राजनीति’ से तंग आ चुके हैं। उन्होंने कहा, “कड़वी सच्चाई यह है कि इन दलों के नेता अपने अंधकारमय भविष्य का अंदाजा लगाकर स्वाभाविक रूप से सुरक्षित राजनीतिक ठिकाना तलाशने लगते हैं।”
उप मुख्यमंत्री के अनुसार, जब किसी पार्टी का नेतृत्व अपनी नाकामियों पर आत्ममंथन करने के बजाय बाहरी शक्तियों पर दोष मढ़ने लगता है, तो वहां के कार्यकर्ता और नेता खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।
ममता और उद्धव के नेतृत्व पर साधा निशाना
उपमुख्यमंत्री ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हो रही टूट और पार्टी नेताओं के पलायन का सीधा कारण नेतृत्व पर “घटता भरोसा” है। उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व वाले ‘इंडी गठबंधन’ (I.N.D.I.A Alliance) पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि बाहर से एकता का दावा करने वाला यह गठबंधन अंदर से “तार-तार” हो चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इनकी एकता का दावा तो ऐसा है कि “फेवीकोल का जोड़ भी शरमा जाए,” लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है।
विपक्ष की ‘प्रिय आदत’ पर सवाल
केशव मौर्य ने आगे कहा कि अपनी राजनीतिक नाकामियों, नेतृत्व के संकट और संगठन की कमजोरी पर आत्ममंथन करने के बजाय हर बात के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराना विपक्ष का “प्रिय शगल” बन चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता सब देख रही है और वह इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि वर्तमान में विपक्षी दलों के सामने समस्या भाजपा नहीं, बल्कि उनकी अपनी विफलताएं और नेतृत्व का अभाव है।
इस बयान के साथ केशव प्रसाद मौर्य ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि भाजपा पर लग रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं और विपक्षी दलों के नेता स्वेच्छा से अपनी पार्टी का दामन छोड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें वहां अब कोई भविष्य नजर नहीं आ रहा है।
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