आगरा में जैन युवाओं की अनूठी मिसाल: ‘मुनि सेवा भक्त परिवार’ के जरिए धर्म की अलख जगा रही युवा पीढ़ी

RELIGION/ CULTURE

आगरा: आज की भागदौड़ भरी और तकनीकी जीवनशैली में जहाँ युवा पीढ़ी भौतिक सुख-सुविधाओं की ओर अधिक आकर्षित हो रही है, वहीं आगरा के ट्रांस यमुना कॉलोनी के जैन युवाओं ने धर्म और संस्कृति को संजोने का एक अनुकरणीय मार्ग चुना है। अपने भीतर छिपे सेवा भाव को विस्तार देते हुए, इन युवाओं ने “मुनि सेवा भक्त परिवार” नामक एक समूह का गठन किया है, जो समाज में धर्म की अलख जगाने के लिए समर्पित है।

मंदिरों में लौटाई रौनक

इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निरंतरता है। समूह के युवाओं ने तय किया है कि वे प्रत्येक सप्ताह एक निश्चित दिन सामूहिक रूप से शहर के विभिन्न जैन मंदिरों का भ्रमण करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य न केवल उन मंदिरों तक पहुँचना है जहाँ श्रद्धालुओं की संख्या कम होती है, बल्कि वहां नियमित धार्मिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना भी है।

भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम

प्रत्येक सप्ताह सुबह 7 बजे का समय इन युवाओं के लिए बेहद खास होता है। सादे सफेद वस्त्रों में सुसज्जित होकर, जब 20 से 25 युवाओं का समूह मंदिर पहुँचता है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। णमोकार मंत्र के मंत्रोच्चार और भगवान के अभिषेक के दौरान केसरिया जल की फुहारें मंदिर की फिजा में नई ऊर्जा भर देती हैं। यह न केवल पूजा का एक अनुष्ठान है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से कितनी मजबूती से जुड़ी हुई है।

‘युवा ही हैं धर्म के सच्चे संवाहक’

समूह के युवाओं का मानना है कि धर्म कोई ऐसी वस्तु नहीं जिसे केवल बुजुर्गों तक सीमित रखा जाए। उनका यह प्रयास समाज को एक स्पष्ट संदेश देता है कि आधुनिकता के दौर में भी युवाओं के भीतर आध्यात्म के प्रति गहरी आस्था जीवित है। इस अनूठे अभियान के माध्यम से वे अपने जैसे अन्य युवाओं को भी धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

​इन युवाओं ने संभाली कमान

इस धार्मिक अभियान को सफलता की ओर ले जाने में राजीव जैन, बिप्लव जैन (विमल परिवार), संदीप जैन, मोहित जैन, शेखर जैन, पंकज जैन, सीए प्रतीक जैन, कृष जैन, वैभव जैन और दर्पण जैन जैसे उत्साही युवा श्रद्धालु दिन-रात योगदान दे रहे हैं। इन सभी का संकल्प है कि इस अभियान को आगरा के हर उस मंदिर तक ले जाना है जहाँ उनकी उपस्थिति से धर्म की ज्योति और अधिक प्रज्वलित हो सके।

Dr. Bhanu Pratap Singh