मेहनत का परचम: उज्ज्वल सिंह बने भारतीय सेना में लेफ्टीनेंट
सपनों को सच करने की कहानी
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Agra, Uttar Pradesh, India.
आगरा। सैंट पीटर्स कॉलेज, आगरा के मेधावी छात्र एवं प्रतिभाशाली क्रिकेटर उज्ज्वल सिंह ने अपनी मेहनत और समर्पण के दम पर भारतीय सेना में लेफ्टीनेंट पद हासिल कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे आगरा शहर के लिए गर्व का विषय बन गई है।
एनडीए से सेना तक का सफर
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित एन0डी0ए0 (नेशनल डिफेन्स एकेडमी) परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर उज्ज्वल सिंह ने एस0एस0बी0 (सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड) साक्षात्कार में भी श्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने ऑल इंडिया स्तर पर 493वीं रैंक प्राप्त की। वहीं भारतीय सेना की टीईएस (टेक्निकल एंट्री स्कीम) में उनका ऑल इंडिया रैंक 28 रहा, जो उनकी असाधारण क्षमता का प्रमाण है।
इंजीनियरिंग से लेफ्टीनेंट तक का मार्ग
टीईएस भारतीय सेना का चार वर्षीय इंजीनियरिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसे पूर्ण करने के बाद अभ्यर्थियों को लेफ्टीनेंट पद पर नियुक्ति दी जाती है। उज्ज्वल सिंह ने इस कठिन और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया को पार करते हुए यह मुकाम हासिल किया, जो उनकी अनुशासन, धैर्य और दृढ़ निश्चय का परिणाम है।
संस्कारों और शिक्षा की मजबूत नींव
उज्ज्वल सिंह के पिता डॉ0 मंयक प्रताप सिंह, डॉ0 भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET), खंदारी में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष हैं। उनकी माता श्रीमती रीना चौधरी बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापिका हैं। साथ ही वे वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ0 देवी सिंह नरवार के पौत्र हैं, जिनके संस्कारों ने उन्हें ऊंचाइयों तक पहुंचने की प्रेरणा दी।
खेल और शिक्षा का संतुलन
शिक्षा के साथ-साथ उज्ज्वल सिंह ने खेल के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। वे स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेल चुके हैं। यह उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है कि उन्होंने पढ़ाई और खेल दोनों में उत्कृष्ट संतुलन बनाए रखा।
बधाइयों का तांता
आर0बी0एस0 महाविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो0 ए0के0 सिंह एवं राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष डॉ0 योगेन्द्र सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ0 देवी सिंह नरवार को बधाई दी। इस सफलता से पूरे परिवार में हर्ष और गर्व का वातावरण है।
संपादकीय: मेहनत को सलाम, युवाओं के लिए संदेश
उज्ज्वल सिंह की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है। आज के समय में जहां शॉर्टकट की चाहत बढ़ती जा रही है, वहीं उज्ज्वल सिंह ने यह साबित कर दिया कि सच्ची सफलता केवल कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास से ही मिलती है।
उनकी यात्रा हमें यह सिखाती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। परिवार के संस्कार, शिक्षकों का मार्गदर्शन और स्वयं का आत्मविश्वास—इन तीन स्तंभों पर खड़ी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए दिशा तय करती है।
आज जरूरत है कि हमारे युवा उज्ज्वल सिंह जैसे उदाहरणों से प्रेरणा लें और अपने जीवन में अनुशासन और समर्पण को अपनाएं। देश को ऐसे ही युवाओं की आवश्यकता है, जो अपने सपनों के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी योगदान दें।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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