आगरा: सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती के 456वें सालाना उर्स के मौके पर फतेहपुर सीकरी की ऐतिहासिक दरगाह ‘रंग-ए-सूफियाना’ के रंग में सराबोर नजर आई। बुधवार की पूरी रात दरगाह प्रांगण में कौमी एकता, मुहब्बत और भाईचारे की ऐसी मशाल जली, जिसकी चमक ने देशभर से आए जायरीनों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अवसर था भव्य ‘कौमी मुशायरे’ का, जहाँ नामचीन शायरों ने अपनी कलम से रूहानी समां बांध दिया।
सांसद राजकुमार चाहर ने किया अमन की महफिल का आगाज
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ बुधवार रात करीब 11 बजे भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय सांसद राजकुमार चाहर ने किया। दरगाह पहुँचकर उन्होंने समाज में सौहार्द और एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सूफी संतों की यह धरती हमेशा से अमन और भाईचारे की प्रतीक रही है और ऐसी महफिलें दिलों को जोड़ने का काम करती हैं।
सज्जादानशीं की सरपरस्ती और शायरों का जादू
दरगाह के सज्जादानशीं पीरजादा अरशद फरीदी चिश्ती की अध्यक्षता में आयोजित इस मुशायरे का संचालन मशहूर एंकर शाजिया अलीम ने अपनी जादुई आवाज में किया। जैसे-जैसे रात गहराती गई, दरगाह का प्रांगण खचाखच भर गया और शेरो-शायरी का दौर परवान चढ़ने लगा।
महफिल की कुछ खास पंक्तियाँ:
विश्व प्रसिद्ध शायर मंजर भोपाली ने जब पढ़ा— “दफ्तर वजीर का हो ना दरबार शाह का, फरियाद करने वाली कोई खानकाह हो…” तो पूरा परिसर वाह-वाही से गूंज उठा।
सारिका मलिक की गजल के इस शेर “जो कहते थे आसमां है तुम्हारा, वही मेरी शोहरत से जलने लगे हैं…” ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
अलंकृत श्रीवास्तव ने “जब जमाने में कहीं ना मिली दुख की दवा, ज़हन में तब मेरे मालिक ने उतारी गज़लें…” पढ़कर उन्होंने खूब तालियां बटोरीं।
भोर तक चला शायरी का दौर
मुशायरे में डॉ. माजिद देवबंदी, डॉ. महताब आलम, जनाब मोइन शादाब, डॉ. मुमताज आलम रिज़वी और डॉ. वसीम राशिद जैसे दिग्गज शायरों ने रात 3:00 बजे तक अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधे रखा।
सज्जादानशीं पीरजादा अरशद फरीदी चिश्ती ने ‘रंग-ए-सूफियाना’ की सफलता पर बाबा से दुआ की और घोषणा की कि कौमी एकता को बढ़ावा देने वाला यह सूफियाना आयोजन अब हर वर्ष इसी भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा।
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