आगरा: ताजनगरी में साइबर अपराधियों ने ठगी का ऐसा जाल बुना है जिसने आम आदमी से लेकर रिटायर्ड सैन्य अफसरों तक को हिलाकर रख दिया है। पिछले कुछ दिनों में आगरा के अलग-अलग इलाकों से ठगी के चार बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें जालसाजों ने 55.47 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम पर हाथ साफ कर दिया। पुलिस ने सभी मामलों में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इन घटनाओं ने शहरवासियों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी कर दिया है।
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल के खाते से 9.66 लाख साफ
शमसाबाद मार्ग निवासी रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अवनीशपाल सिंह को ठगों ने बैंकिंग सेवा के नाम पर निशाना बनाया। 16 मार्च को खुद को बैंक कर्मचारी बताकर एक कॉलर ने उनके क्रेडिट कार्ड की सर्विस एक्टिवेट करने का झांसा दिया। बातों में उलझाकर ठगों ने उनके कार्ड से पांच बैक-टू-बैक ट्रांजेक्शन किए और 10 लाख की लिमिट वाले कार्ड से 9.66 लाख रुपये उड़ा लिए।
ऑनलाइन ट्रेडिंग में 26 लाख की ‘महाठगी’
कमला नगर के कर्मयोगी एन्क्लेव निवासी अनुराग गौतम को 30% मुनाफे का सब्जबाग दिखाकर जाल में फंसाया गया। ठगों ने शुरुआत में फर्जी लाभ दिखाकर उनका भरोसा जीता और फिर निवेश के नाम पर उनसे 26 लाख रुपये हड़प लिए। जब रकम वापस निकालने का समय आया, तो ठगों ने संपर्क तोड़ दिया।
800% मुनाफे का लालच और 12.31 लाख की चपत
शमसाबाद के पुरा सूरजमल निवासी रामनाथ सिंह को एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए फंसाया गया। ठगों ने उन्हें अविश्वसनीय 800 प्रतिशत मुनाफे का लालच दिया। मुनाफे के चक्कर में रामनाथ ने किश्तों में 12.31 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। साइबर सेल अब इस ठगी के डिजिटल नेटवर्क को खंगाल रही है।
रिटायर्ड शिक्षिका को 10 दिन तक रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’
सबसे संवेदनशील मामला एक रिटायर्ड शिक्षिका का है, जिन्हें ठगों ने ‘पुलवामा हमले’ से कनेक्शन का डर दिखाकर 7.50 लाख रुपये लूट लिए। ठगों ने वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी और फर्जी सेटअप दिखाकर उन्हें 10 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा। डरी हुई शिक्षिका ने चेक और अन्य माध्यमों से ठगों के खातों में रकम जमा करा दी।
साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स की सलाह: ‘भरोसा, लालच और डर’ से बचें
आगरा पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने जनता से अपील की है कि वे इन 5 संकेतों को पहचानें:
डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता: कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल पर किसी को ‘अरेस्ट’ नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है।
अविश्वसनीय मुनाफे से बचें: 30% से 800% तक के मुनाफे के वादे 100% फर्जी होते हैं।
बैंकिंग सुरक्षा: बैंक कभी भी फोन पर OTP, CVV या पिन (PIN) नहीं मांगता।
अनजान लिंक: व्हाट्सएप ग्रुप या अनजान एसएमएस (SMS) के जरिए भेजे गए ऐप डाउनलोड न करें।
तुरंत करें कॉल: यदि ठगी हो जाए, तो बिना देरी किए 1930 नंबर पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
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