मथुरा/आगरा: अपनी बेबाक बयानबाजी और आध्यात्मिक कथाओं के लिए मशहूर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने अब आधुनिक जीवनशैली और खान-पान के तरीकों पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। स्वास्थ्य और पारंपरिक भारतीय पद्धतियों के बीच गहरा संबंध बताते हुए उन्होंने आधुनिक रसोई के सबसे महत्वपूर्ण उपकरण यानी ‘LPG गैस’ को कटघरे में खड़ा किया है। उनका दावा है कि गैस पर बनी रोटियाँ सीधे तौर पर पुरुषों की शारीरिक क्षमता और पौरुष (Physical Strength) को प्रभावित कर रही हैं।
मिट्टी के चूल्हे बनाम आधुनिक गैस
देवकीनंदन ठाकुर ने तर्क दिया कि पुराने समय में मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी और उपलों (कंडे) की धीमी आँच पर पकने वाला खाना न केवल स्वादिष्ट होता था, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होता था।
आधुनिक किचन की आदतों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा “आज गैस की बनी रोटी खा-खाकर पुरुषों की ताकत कम हो गई है। गैस की आग प्राकृतिक नहीं है; वह रसायनों और दबाव (Pressure) से पैदा की गई कृत्रिम गर्मी है। चूल्हे की रोटी में जो सोंधापन और शरीर को बल देने वाली शक्ति थी, वह अब मॉडर्न किचन की चकाचौंध में कहीं खो गई है।”
पारंपरिक पद्धति की ओर लौटने का आह्वान
कथावाचक ने आधुनिक पीढ़ी को अपनी जड़ों की ओर लौटने की सलाह दी है। उनका मानना है कि कृत्रिम ऊर्जा के बजाय प्राकृतिक स्रोतों से तैयार भोजन ही शरीर को दीर्घायु और शक्तिशाली बनाए रख सकता है।
देवकीनंदन ठाकुर का यह बयान सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ चुका है, जहाँ एक तरफ लोग इसे वैज्ञानिक आधार पर परख रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक जीवनशैली के समर्थन में उतर आए हैं।
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