Agra News: दयालबाग में उमड़ा भक्ति का सैलाब, हुजूर प्रो. प्रेम सरन सतसंगी साहब का जन्मोत्सव श्रद्धा और सेवा के साथ मनाया गया

PRESS RELEASE

आगरा (दयालबाग): राधास्वामी सतसंग दयालबाग के आठवें आचार्य परम पूज्य हुजूर प्रो. प्रेम सरन सतसंगी साहब का पावन जन्मोत्सव सोमवार को ‘आध्यात्मिक होली’ के उल्लास के बीच अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। भक्ति, सेवा और अनुशासन के संगम वाले इस आयोजन में न केवल स्थानीय संगत बल्कि देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु महाराज के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की।

खेतों में उमड़ा सेवा का उत्साह, तीन शिफ्टों में हुआ कार्य

जन्मोत्सव के अवसर पर दयालबाग की परंपरा के अनुरूप सेवा और श्रम को विशेष महत्व दिया गया। सुबह से शाम तक तीन अलग-अलग शिफ्टों में कृषि कार्य (Field Work) का आयोजन किया गया। खेतों में सतसंगी भाई-बहनों और बच्चों ने अद्भुत जोश के साथ श्रमदान किया। इस दौरान परम पूज्य गुरु महाराज और परम आदरणीय रानी साहिबा जी की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरी संगत को ऊर्जा से भर दिया।

सुपरह्यूमन बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘जेंडर-फ्री सुपरह्यूमन बच्चों’ द्वारा दी गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। गुरु महाराज के सम्मान में बच्चों ने कई प्रेरक कार्यक्रम पेश किए, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। वहीं, प्रेम नगर स्थित पावन कोठी (3/23) पर भी सुबह विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ गुरु भक्ति के स्वर गूंजते रहे।

डिजिटल माध्यम से दुनिया भर में जुड़ा सतसंग

​दयालबाग के इस भव्य आयोजन की आधुनिकता और पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे कार्यक्रम का सजीव प्रसारण (Live Broadcast) वैश्विक स्तर पर किया गया। दुनिया भर के 580 से अधिक केंद्रों पर श्रद्धालुओं ने घर बैठे इस उत्सव का आनंद लिया और अपनी हाजिरी दी।

​प्रसाद में घुली ‘गुजिया’ की मिठास

​होली के पावन पर्व और जन्मोत्सव के दोहरे अवसर पर संगत के बीच नमकीन प्रसाद के साथ-साथ पारंपरिक गुजिया का वितरण किया गया। दयालबाग परिसर में हर तरफ “मेरे हिये में बजत बधाई…” जैसे भजनों की गूंज रही, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।

​दयालबाग का यह जन्मोत्सव एक बार फिर साबित कर गया कि यहाँ भक्ति केवल प्रार्थना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, अनुशासन और सामूहिक श्रम का एक जीवंत उदाहरण है।

Dr. Bhanu Pratap Singh