मुंबई (अनिल बेदाग): भारत की तेज़ी से बदलती जनसांख्यिकी के बीच एक गंभीर चुनौती सिर उठा रही है। वर्तमान में देश में लगभग 16 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं, जिनकी संख्या 2050 तक 34 करोड़ पहुँचने का अनुमान है। जहाँ एक ओर देश को 25 लाख ‘सीनियर लिविंग यूनिट्स’ की दरकार है, वहीं दूसरी ओर हमारे बुजुर्ग अकेलेपन और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। इसी संकट के बीच संवेदना और संकल्प की एक सुरीली किरण बनकर उभरे हैं पद्मश्री डॉ. मुकेश बत्रा।
14वां संस्करण: संगीत के जरिए सेवा का संकल्प
मुंबई के नरिमन पॉइंट स्थित वाई. बी. चव्हाण ऑडिटोरियम में डॉ. मुकेश बत्रा के बहुप्रतीक्षित वार्षिक गायन कार्यक्रम ‘यादों की बहार’ के 14वें संस्करण का सफल आयोजन हुआ। यह शाम केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक उद्देश्य के लिए समर्पित थी। इस वर्ष कार्यक्रम का लक्ष्य ‘द शेफर्ड विडोज होम’ में रहने वाली वृद्ध विधवाओं की सहायता के लिए फंड जुटाना और उनके कल्याण के प्रति जागरूकता फैलाना था।
550 संगीत प्रेमियों ने दी संवेदना की आहूति
550 से अधिक संगीत प्रेमियों और दानवीरों की मौजूदगी में डॉ. बत्रा ने भारतीय सिनेमा के ‘स्वर्णिम युग’ के सदाबहार गीतों को अपनी आवाज़ दी। पुरानी यादों को ताज़ा करते इन गीतों ने ऑडिटोरियम में मौजूद हर व्यक्ति को सेवा और संवेदना के संदेश से जोड़ दिया।
”बुजुर्ग केवल देखभाल नहीं, गरिमा के हकदार हैं”: डॉ. बत्रा
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मुकेश बत्रा ने भावुक होते हुए कहा “हमारे बुजुर्ग समाज की नींव हैं। वे केवल बुनियादी देखभाल के मोहताज नहीं हैं, बल्कि वे साथ, गरिमा और अपनत्व के सच्चे हकदार हैं। करुणा की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार चाहे समय दे या संसाधन, उसे योगदान ज़रूर देना चाहिए।”
भविष्य की बड़ी चुनौती
आंकड़े बताते हैं कि भारत में सीनियर केयर का बुनियादी ढांचा अभी भी शुरुआती चरण में है। डॉ. बत्रा जैसे व्यक्तित्वों द्वारा की गई ऐसी पहल न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि समाज के संपन्न वर्ग को उनकी नैतिक ज़िम्मेदारी की याद भी दिलाती है।
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