बस्ती/अयोध्या। बस्ती से लापता दारोगा अजय गौड़ का शव सोमवार को अयोध्या की सीमा में सरयू नदी से बरामद होने के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक तूल पकड़ लिया है। मृतक के छोटे भाई और झांसी के एडीएम (ADM) अरुण कुमार ने इस घटना को एक ‘सुनियोजित साजिश’ करार दिया है। उन्होंने परसरामपुर थाने के स्टाफ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे थाने को सस्पेंड करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अमहट घाट पर बाइक, सरयू में लाश: गुत्थी उलझी
दारोगा अजय गौड़ 5 फरवरी से लापता थे। उनकी बाइक बस्ती के अमहट घाट (कुआनो नदी) के पास मिली थी, लेकिन शव मीलों दूर अयोध्या की सरयू नदी में बरामद हुआ। एडीएम अरुण कुमार का सवाल है कि अगर बाइक बस्ती में थी, तो दारोगा अयोध्या कैसे पहुंचे? उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाई की हत्या कर शव को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से नदी में फेंका गया है।
एएसपी का बयान: शरीर पर नहीं मिले चोट के निशान
एडिशनल एसपी श्यामाकांत ने बताया कि प्रारंभिक फोरेंसिक जांच में अजय के शरीर पर चोट के कोई बाहरी निशान नहीं मिले हैं। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जा रहा है जिसकी वीडियोग्राफी भी होगी। एएसपी ने आश्वासन दिया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की असली वजह साफ हो जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सीसीटीवी और ‘मिश्रौलिया’ कनेक्शन
जांच में पुलिस को बस्ती मुख्यालय के कुछ सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, जिनमें अजय की मौजूदगी दिखी थी। 2016 बैच के जांबाज दरोगा रहे अजय मूलतः देवरिया के निवासी थे और बस्ती में सपरिवार रह रहे थे। उनकी रहस्यमयी मौत ने महकमे के भीतर के आपसी तालमेल और सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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