कांसेप्ट टू रियलिटी: दयालबाग में वर्चुअल लैब्स और AI पर मंथन, तकनीकी शिक्षा को मिली नई दिशा

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आगरा। तकनीकी शिक्षा को ज्यादा व्यावहारिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर जोर देते हुए दयालबाग शिक्षण संस्थान के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग ने दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “कॉन्सेप्ट टू रियलिटी” का आयोजन किया। कार्यक्रम में वर्चुअल लैब्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, माइक्रो-फ्लूडिक्स और सिमुलेशन आधारित शिक्षण पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।

संगोष्ठी का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने किया। उन्होंने कहा कि वर्चुअल लैब्स ने शिक्षा को भौतिक संसाधनों की सीमाओं से काफी हद तक मुक्त कर दिया है। अब छात्र महंगे उपकरणों के बिना भी उच्चस्तरीय प्रयोगों का अनुभव ले सकते हैं। उनके मुताबिक, शिक्षा का लक्ष्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि प्रयोग, विश्लेषण और नवाचार की क्षमता विकसित करना है।

जटिल विषयों की आसान समझ

आईआईटी बॉम्बे के प्रो. अमित अग्रवाल ने माइक्रो-फ्लूडिक्स जैसे उन्नत विषयों पर बात करते हुए कहा कि पारंपरिक लैब्स में संसाधनों की कमी के कारण ऐसे प्रयोग सीमित रह जाते हैं। वर्चुअल लैब्स और सिमुलेशन प्लेटफॉर्म इन प्रक्रियाओं को दृश्य और दोहराने योग्य बनाते हैं, जिससे छात्र बिना जोखिम बेहतर समझ विकसित कर पाते हैं।

एआई से पर्सनलाइज्ड लर्निंग

आईआईटी दिल्ली के प्रो. रंजन बोस ने बताया कि एआई और वर्चुअल लैब्स का मेल शिक्षा को ज्यादा स्मार्ट बना रहा है। एआई आधारित सिस्टम छात्रों की सीखने की गति और कमजोरियों के अनुसार प्रयोगों को ढाल सकते हैं, जिससे पढ़ाई अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी हो रही है।

दूरदराज़ छात्रों के लिए अवसर

आईआईआईटी हैदराबाद के प्रो. वेंकटेश चोप्पेला ने कहा कि वर्चुअल लैब्स ने तकनीकी शिक्षा में बराबरी का मौका दिया है। अब ग्रामीण इलाकों के छात्र भी वही प्रयोग कर पा रहे हैं जो पहले चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थे। उन्होंने इसे कौशल विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया।

कोविड काल में सहारा

वक्ताओं ने याद दिलाया कि महामारी के दौरान जब संस्थान बंद थे, तब वर्चुअल लैब्स ने व्यावहारिक शिक्षा को जारी रखने में अहम भूमिका निभाई। छात्रों ने घर से प्रयोग कर अपनी तकनीकी दक्षता बनाए रखी।

वर्चुअल लैब हैकाथॉन–2026

संगोष्ठी के साथ आयोजित दयालबाग X वर्चुअल लैब हैकाथॉन–2026 में देशभर की 150 से ज्यादा टीमों ने हिस्सा लिया। शुरुआती दौर के बाद छह टीमें फाइनल में पहुंचीं और तीन को विजेता चुना गया।

प्रथम पुरस्कार: टीम बगबस्टर्स, जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, नोएडा – मॉडर्न फिजिक्स वर्चुअल लैब

द्वितीय पुरस्कार: टीम प्रोटोमाइंड्स, दयालबाग शिक्षण संस्थान – फसल जल तनाव और अनुकूली सिंचाई मॉडल

तृतीय पुरस्कार: टीम दरुकाX, सिटी इंजीनियरिंग कॉलेज, बेंगलुरु – इंटेलिजेंट फायरफाइटिंग रोबोट वर्चुअल लैब

निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की तकनीकी समझ और नवाचार की सराहना की।

छात्रों और फैकल्टी की भागीदारी

कार्यक्रम में 200 से अधिक छात्र और शिक्षक शामिल हुए। संस्थान के 14 फैकल्टी सदस्यों ने अपनी विकसित वर्चुअल लैब्स का प्रदर्शन किया। आयोजन में छात्रों का उत्साह और अनुशासन भी चर्चा का विषय रहा।

समापन सत्र में डीन प्रो. डी. के. चतुर्वेदी ने कहा कि वर्चुअल लैब्स और एआई आधारित शिक्षा छात्रों को वास्तविक औद्योगिक और सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए तैयार कर रही है। कार्यक्रम का समापन संस्थान की पारंपरिक प्रार्थना के साथ हुआ।

Dr. Bhanu Pratap Singh