आगरा: भारतीय सौंदर्यशास्त्र की दार्शनिक और समृद्ध परंपरा को आधुनिक शिक्षा पद्धति से जोड़ने के लिए दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) ने एक मील का पत्थर स्थापित किया है। संस्थान के संस्कृत विभाग द्वारा स्वयं मूक्स (SWAYAM MOOCs) पीजी कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय सौंदर्यशास्त्र पर आधारित पाठ्यक्रम निर्माण के लिए एकदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
विद्वानों का बौद्धिक संगम
हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यशाला में मेघालय के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी ने ऑनलाइन जुड़कर भारतीय सौंदर्य-दृष्टि के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की प्रो. सारिका वार्ष्णेय और RBS कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विजय कुमार श्रीवास्तव ने पाठ्यक्रम को अकादमिक गहराई देने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
आनंद कुमारस्वामी के दर्शन पर जोर
कार्यशाला का मुख्य केंद्र आचार्य आनंद कुमारस्वामी की सौंदर्य-मीमांसा रही। बीएचयू, दिल्ली विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने इस बात पर मंथन किया कि कैसे प्राचीन सिद्धांतों को समकालीन अकादमिक ढांचे में फिट किया जाए।
निदेशक का संदेश: तकनीक बनाम मानवता
DEI के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने इस पहल की सराहना करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कभी भी मानव की मौलिकता और विशिष्टता का स्थान नहीं ले सकती।”
कार्यक्रम का संचालन पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. निशीथ गौड़ ने किया। इस दौरान कला संकाय प्रमुख प्रो. संगीता सैनी और संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता सहित कई शोधार्थी और प्राध्यापक उपस्थित रहे।
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