वाराणसी: भगवान शिव की प्रिय नगरी काशी में महाशिवरात्रि के महापर्व की औपचारिक शुरुआत हो गई है। आगामी 15 फरवरी को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व को लेकर श्री काशी विश्वनाथ धाम में शुक्रवार से उत्सव का बिगुल फूंक दिया गया। परंपरा के अनुसार, महोत्सव का शुभारंभ प्रथम पूज्य भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुआ।
गणेश पूजन के साथ उत्सव का श्रीगणेश
मंदिर न्यास की ओर से मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने प्रथम पूज्य गौरी नंदन को वस्त्र, पुष्प, दुर्वा और नैवैद्य अर्पित कर उनकी भव्य आरती उतारी। इस धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही विश्वनाथ धाम में महाशिवरात्रि महोत्सव का औपचारिक आरंभ हो गया। अब मंदिर परिसर में स्थित सभी देवी-देवताओं और विग्रहों का रुद्राभिषेक कर उन्हें जागृत किया जाएगा और समस्त देवताओं का आह्वान कर श्रद्धालुओं को इस महाकुंभ में आमंत्रित किया जाएगा।
13 फरवरी को सगुन की हल्दी
महाशिवरात्रि यानी शिव विवाह के उत्सव से पहले बाबा विश्वनाथ को हल्दी लगाने की रस्म भी बेहद खास होती है। सदियों पुरानी लोक परंपरा का निर्वहन करते हुए 13 फरवरी की शाम टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल प्रतिमा को सगुन की हल्दी लगाई जाएगी। बड़ी शीतला माता मंदिर के उपमहंत अवशेष पाण्डेय (कल्लू महाराज) ने बताया कि यह रस्म शिव विवाह के उत्सव का सबसे भावनात्मक हिस्सा होती है।
श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजाम
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि महापर्व की तैयारियों को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। प्रतिदिन होने वाले शास्त्रीय आयोजनों की सूचना श्रद्धालुओं के लिए जारी की जाती रहेगी, ताकि देश-दुनिया से आने वाले शिवभक्त बाबा के इस दिव्य विवाह उत्सव का आनंद ले सकें।
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