भारत-अरब दोस्ती का नया दौर: 6 मुस्लिम देशों के साथ FTA की शर्तें तय, पाकिस्तान-बांग्लादेश में मची खलबली

NATIONAL

नई दिल्ली। भारत ने अपनी वैश्विक आर्थिक कूटनीति को धार देते हुए खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के छह देशों बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)  के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत शुरू करने के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

पड़ोसियों को क्यों लगेगा झटका?

​भारत की इस ताबड़तोड़ आर्थिक प्रगति और खाड़ी देशों के साथ बढ़ती नजदीकी ने पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है। जहाँ भारत अब खाड़ी क्षेत्र में अपनी बाजार हिस्सेदारी मजबूत कर रहा है, वहीं ये देश सिर्फ मूकदर्शक बने रहने को मजबूर हैं।

​ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक ताकत

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह समझौता भारत के ऊर्जा स्रोतों में विविधता (Diversification) लाएगा। खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनके हितों और द्विपक्षीय निवेश को इस डील से बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

व्यापार के बढ़ते आंकड़े (वित्त वर्ष 2024-25)

​भारत और जीसीसी के बीच व्यापारिक रिश्ते लगातार नई ऊंचाई छू रहे हैं:

​कुल द्विपक्षीय व्यापार: 161.82 अरब डॉलर से बढ़कर 178.7 अरब डॉलर पहुँचा।

​प्रमुख भागीदार: UAE भारत का तीसरा और सऊदी अरब पांचवां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।

एक्सपोर्ट-इंपोर्ट: भारत मुख्य रूप से क्रूड ऑयल और गैस का आयात करता है, जबकि अनाज, कीमती पत्थर, मशीनरी और केमिकल का निर्यात करता है।

जीसीसी देशों के साथ व्यापार की स्थिति (एक नज़र में)

देश  भारत का एक्सपोर्ट  भारत का इंपोर्ट  मुख्य व्यापारिक वस्तु

UAE  $36.63 अरब  $63.40 अरब  आभूषण, मशीनरी, पेट्रोलियम

सऊदी अरब।  $11.75 अरब   $30.12 अरब  कच्चा तेल, केमिकल

कतर $1.68 अरब   $12.46 अरब।  LNG (प्राकृतिक गैस)

ओमान।  $4 अरब   $6.54 अरब

FTA वार्ता का इतिहास

भारत और जीसीसी के बीच बातचीत का सिलसिला 2006 और 2008 में शुरू हुआ था, लेकिन फिर रुक गया। अब करीब 18 साल बाद इसे नई गति मिली है। यह समझौता न केवल व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम करने में मदद करेगा, बल्कि भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए खाड़ी के बाजारों को शुल्क-मुक्त बनाएगा।

Dr. Bhanu Pratap Singh