आगरा। किरावली थाने में पुलिस की अमानवीय ‘थर्ड डिग्री’ का शिकार हुए राजू की चीखें गुरुवार को मंडलायुक्त सभागार में गूंजीं। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग की जनसुनवाई में जब राजू अपने पिता और भतीजे के कंधों का सहारा लेकर चलने-फिरने में लाचार हालत में पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई।
उल्टा लटकाकर पीटा, दोनों पैर टूटे
मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नरेश पारस के साथ आयोग के समक्ष पेश हुए राजू ने बताया कि पुलिस ने उसे थाने में न केवल बेरहमी से पीटा, बल्कि उसे उल्टा लटकाकर पैरों पर प्रहार किए। चोट इतनी गंभीर थी कि राजू के दोनों पैर टूट गए। पीड़ित ने अपने टूटे पैरों के एक्स-रे और मेडिकल रिपोर्ट आयोग के अध्यक्ष राजीव लोचन को सौंपे।
आयोग की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब पुलिस प्रशासन ने तर्क दिया कि दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, तो आयोग अध्यक्ष ने खरी-खरी सुनाते हुए कहा, “निलंबन इस बात का प्रमाण है कि घटना घटी है और पुलिसकर्मियों ने अपराध किया है।” आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए 4 सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है।
पुलिस की ‘चाल’ नाकाम
अधिवक्ता नरेश पारस ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि आयोग की सुनवाई सुबह 10 बजे थी, लेकिन पुलिस ने जानबूझकर 10:30 बजे फोन करके नोटिस रिसीव करने को कहा, ताकि पीड़ित आयोग तक न पहुंच सके। हालांकि, कड़ी मशक्कत के बाद वे समय पर पहुंचे और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज करने की मांग की।
न्याय की उम्मीद
नरेश पारस ने जोर देकर कहा कि केवल सस्पेंशन काफी नहीं है। कानून के रखवालों ने कानून को कुचला है, इसलिए उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आयोग के सदस्यों ने पीड़ित की हालत देखकर संवेदना व्यक्त की और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।
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