नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में बुधवार को हुए हंगामे ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने खुलासा किया है कि विपक्ष के ‘अमर्यादित’ बर्ताव और प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न हुए खतरे के कारण उन्होंने पीएम मोदी को सदन में न आने का आग्रह किया था।
लोकतंत्र की मर्यादा बचाने के लिए लिया फैसला
स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि बुधवार को जो हुआ, वह लोकसभा के इतिहास में ‘काले धब्बे’ की तरह है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ सांसद प्रधानमंत्री के खिलाफ ‘गलत बर्ताव’ की योजना बना रहे थे। स्पीकर ने कहा, “यदि कोई अप्रिय घटना हो जाती तो लोकतंत्र की मर्यादा तार-तार हो जाती। उसे टालने के लिए मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह सदन में न आएं।” इसी के चलते, 2004 के बाद यह पहला मौका रहा जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बिना पीएम के जवाब के ही धन्यवाद प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया।
विपक्ष का तीखा पलटवार
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यदि तीन महिला सांसद पीएम के पास जाकर खड़ी हो गईं, तो क्या उन्हें खतरा हो गया? यह कैसी बातें हैं?” प्रियंका ने मीडिया पर भी सवाल दागा कि वे सरकार से यह क्यों नहीं पूछते कि नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने से किस आधार पर रोका गया।
बीजेपी ने बताया ‘सुरक्षा चूक’ की साजिश
भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी और पूर्व मंत्री रविशंकर प्रसाद ने स्पीकर के कदम का समर्थन किया है। रविशंकर प्रसाद ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि विपक्ष जिस स्तर पर संसद को ले आया है, उससे हर कोई दुखी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्ष अब पीएम का रास्ता रोकने और उन्हें घेरने की राजनीति करेगा?
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