आगरा। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एस.एन.एम.सी.), आगरा ने एक बार फिर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। NEET सुपर स्पेशलिटी (SS) 2025 और AIIMS के हालिया परिणामों में कॉलेज के अलग-अलग विभागों से कुल 29 डॉक्टरों का चयन हुआ है। शानदार रैंकिंग के साथ हुए इस चयन ने न सिर्फ संस्थान की प्रतिष्ठा बढ़ाई है, बल्कि आगरा मंडल का नाम भी देशभर में रोशन किया है।
कॉलेज प्रशासन के मुताबिक NEET SS और AIIMS जैसी परीक्षाएं देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित मेडिकल परीक्षाओं में मानी जाती हैं, जहां सीमित सीटों के लिए देशभर के उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसे में एक साथ 29 चयन को कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
सर्जरी विभाग की मजबूत मौजूदगी, AIIMS पटना में 24वीं रैंक
सर्जरी विभाग के डॉ. प्रखर सिंह ने AIIMS पटना में 24वीं रैंक हासिल कर प्लास्टिक सर्जरी में चयन पाया। उनके साथ विभाग के अन्य डॉक्टरों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
सर्जरी विभाग से चयनित/उत्कृष्ट रैंक पाने वाले डॉक्टर:
डॉ. शिवम खंडेलवाल (63)
डॉ. अनूप (259)
डॉ. सागर (325)
डॉ. प्रशांत गुप्ता, SR (442)
डॉ. सोहम शाह, SR (480)
डॉ. शुभम तिवारी (487)
डॉ. फराज खान, SR (700)
डॉ. ऋषभ यादव (758)
डॉ. शिवकांत (1400)
डॉ. प्रतीक जैन, SR (1500)
डॉ. आकाश (2400)
डॉ. श्रेया (2500)
डॉ. ललित (2900)
डॉ. शिवा (3700)
डॉ. वर्षा (4000)
रेस्पिरेटरी मेडिसिन में टॉप-20 रैंक
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के डॉ. कृष्णकांत त्रिपाठी ने AIIMS पटना में 20वीं रैंक प्राप्त कर पल्मोनरी मेडिसिन में चयन पाया। टॉप-20 में स्थान बनाना कॉलेज के लिए खास उपलब्धि मानी जा रही है।
मेडिसिन विभाग से सबसे ज्यादा 12 चयन
इस बार मेडिसिन विभाग से सर्वाधिक 12 डॉक्टरों का चयन हुआ है।
मेडिसिन विभाग के चयनित डॉक्टर:
डॉ. मिलिंद अग्रवाल (137)
डॉ. रूहानी आहूजा (151)
डॉ. अक्सा जाफरी (158)
डॉ. नितेश (211)
डॉ. प्रिया (350)
डॉ. साहिल विज (550)
डॉ. प्रियंका जोशी (980)
डॉ. आइंस्टीन सरकार (1000)
डॉ. संदीप्ता पांडा (1594)
डॉ. किरुभाकर (1678)
डॉ. अनुपम शुक्ला (1692)
डॉ. निमिष गुप्ता (1966)
प्रधानाचार्य बोले- यह मेहनत और मार्गदर्शन का परिणाम
कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस सफलता को संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि NEET SS और AIIMS जैसी परीक्षाओं में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में चयन होना शिक्षकों के मार्गदर्शन, अनुशासित प्रशिक्षण और डॉक्टरों की मेहनत का नतीजा है।
उन्होंने भरोसा जताया कि चयनित डॉक्टर आगे चलकर DM और MCh जैसी उच्च उपाधियां हासिल कर विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के जरिए समाज और देश को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देंगे।
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