रामपुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा और छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम ने भी शुक्रवार को ट्रस्ट से त्यागपत्र सौंप दिया।
इस्तीफे के साथ ही आजम खान ने ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी की घोषणा करते हुए अपनी बहन निकहत अफलाक को नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं बड़े बेटे मोहम्मद अदीब आजम को ट्रस्ट का सचिव बनाया गया है।
नई कार्यकारिणी में किसे कौन-सी जिम्मेदारी
आजम खान की ओर से घोषित नई टीम में समाजवादी पार्टी के विधायक नसीर अहमद खान को संयुक्त सचिव, मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष और जावेद उर रहमान खान को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इस बदलाव की पुष्टि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. एस.एन. सलाम ने भी की है।
मुलायम-आजम समेत दिग्गजों ने की थी ट्रस्ट की स्थापना
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना मुलायम सिंह यादव, आजम खान, अमर सिंह और जयाप्रदा जैसे नेताओं ने मिलकर की थी। ट्रस्ट को 28 मई 2013 को NCMEI से मान्यता मिली थी। यह ट्रस्ट जौहर यूनिवर्सिटी के साथ-साथ रामपुर पब्लिक स्कूलों के प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी भी संभालता है।
कानूनी मामलों के चलते छोड़ा अध्यक्ष पद
बताया जा रहा है कि आजम खान को अपने खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों के कारण ट्रस्ट अध्यक्ष पद से हटना पड़ा है। साथ ही ट्रस्ट से जुड़े कुछ अन्य सदस्यों को भी केसों में नाम आने के चलते अलग किया गया है।
आजम खान और उनका बेटा अब्दुल्ला आजम फिलहाल डबल पैन कार्ड केस में रामपुर जेल में बंद हैं। वहीं ट्रस्ट पर किसानों की जमीन कब्जाने से जुड़ा मामला भी चल रहा है।
ट्रस्ट पर करीब 30 केस, आजम खान पर 90 मुकदमे
जौहर ट्रस्ट पर इस समय करीब 30 मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, आजम खान के ट्रस्ट में बने रहने से कई मामलों में प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर कामकाज प्रभावित हो रहा था, इसी वजह से उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
मई 2017 में अखिलेश यादव सरकार के जाने और योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद आजम खान और जौहर ट्रस्ट की मुश्किलें बढ़ गई थीं। हालात यह रहे कि रामपुर में आजम खान पर करीब 90 केस दर्ज हुए, जिनमें से करीब 30 केस जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े बताए जा रहे हैं।
1500 बीघा जमीन खरीद का मामला, जांच से छात्र भी परेशान
जौहर यूनिवर्सिटी के लिए खरीदी गई करीब 1500 बीघा जमीन से जुड़े मामलों की जांच पिछले 5 साल से चल रही है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और केसों के चलते विश्वविद्यालय के छात्रों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब ट्रस्ट की कमान नई टीम के हाथों में आने के बाद माना जा रहा है कि संस्थान के संचालन और कानूनी प्रक्रियाओं को अलग तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
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