सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला सड़क किनारे ‘लिविंग स्टैच्यू’ (Living Statue) बनकर बैठी नजर आ रही है। महिला ने अपने पूरे शरीर पर चांदी जैसा रंग पोता हुआ है और वह दुल्हन के श्रृंगार में, गोद में एक बच्चे को लिए बिल्कुल स्थिर मुद्रा में बैठी दिखाई देती है। पहली नजर में राहगीर उसे पत्थर या धातु की मूर्ति समझ लेते हैं और कई लोग उसके साथ फोटो खिंचवाने के लिए रुक जाते हैं।
वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठी रहती है। जब कोई व्यक्ति उसे पैसे देता है, तभी वह हल्की-सी हरकत करती है, जिससे लोगों को एहसास होता है कि यह कोई मूर्ति नहीं, बल्कि एक जीवंत इंसान है। यही दृश्य वीडियो को और अधिक चौंकाने वाला बना देता है।
इस वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स इसे गरीबी और मजबूरी से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि रोज़गार के अभाव में लोग इस तरह के जोखिम भरे और कठिन तरीकों से पेट पालने को मजबूर हैं। वहीं कुछ यूजर्स ने बारीकी से वीडियो देखकर यह दावा किया है कि महिला की गोद में जो बच्चा नजर आ रहा है, वह असली नहीं बल्कि एक डॉल है, ताकि भावनात्मक असर और लोगों का ध्यान और अधिक खींचा जा सके।
कला के जानकारों का मानना है कि ‘लिविंग स्टैच्यू’ एक प्रदर्शन कला (परफॉर्मिंग आर्ट) है, जो विदेशों में काफी लोकप्रिय है। यूरोप और अन्य देशों में सड़क कलाकार इस कला के जरिए अपनी प्रतिभा दिखाते हैं और दर्शकों से दान प्राप्त करते हैं। अब यह कला भारत में भी धीरे-धीरे सड़कों पर दिखाई देने लगी है, जहां यह कौतूहल के साथ-साथ बहस का विषय भी बन रही है।
फिलहाल यह वीडियो जहां लोगों को हैरान कर रहा है, वहीं यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि यह दृश्य कला का उदाहरण है या सामाजिक मजबूरी की तस्वीर। सोशल मीडिया पर यही बहस इस वीडियो को और अधिक वायरल बना रही है।
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