मुंबई (अनिल बेदाग): भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य में तेज़ी से हो रहे विस्तार और बढ़ती परियोजना जटिलताओं के बीच अब प्रतिस्पर्धा का असली पैमाना एक्ज़ीक्यूशन एक्सीलेंस बनता जा रहा है। आने वाले 12 महीने ईपीसी (Engineering, Procurement & Construction) सेक्टर के लिए निर्णायक साबित होंगे, जहां केवल बड़े ऑर्डर बुक नहीं, बल्कि समयबद्ध, सुरक्षित और गुणवत्ता-आधारित निष्पादन ही कंपनियों की वास्तविक पहचान तय करेगा।
इसी संदर्भ में GHV Infra Projects के लिए आगामी वर्ष केवल विस्तार का नहीं, बल्कि दीर्घकालिक मजबूती और विश्वसनीयता को और सुदृढ़ करने का अवसर लेकर आ रहा है। इंडस्ट्री के बदलते समीकरणों में अब क्लाइंट्स की अपेक्षाएं भी स्पष्ट हो चुकी हैं—तेज़ डिलीवरी, उच्चतम सुरक्षा मानक, सस्टेनेबिलिटी और पारदर्शी गवर्नेंस। इन मानकों पर खरा उतरने के लिए संसाधनों से अधिक मज़बूत सिस्टम, अनुभवी नेतृत्व और जवाबदेही की संस्कृति आवश्यक मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर और तेज़ होगा। ऊर्जा दक्षता, पर्यावरणीय अनुपालन और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को अब विकल्प नहीं, बल्कि परियोजना डिज़ाइन और निष्पादन का अभिन्न हिस्सा माना जा रहा है। इस दिशा में GHV Infra अपने ऑपरेशंस में ESG सिद्धांतों को एकीकृत करते हुए विकास को सामाजिक और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रहा है।
ऑपरेशनल मोर्चे पर भी वर्ष 2026 की तैयारी स्पष्ट है। बेहतर प्लानिंग टूल्स, सुदृढ़ सप्लाई चेन कोऑर्डिनेशन और कुशल मानव संसाधन के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही नेतृत्व विकास, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट क्षमताओं और जोखिम प्रबंधन ढांचे में किए गए निवेश से निष्पादन गुणवत्ता में ठोस सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य में वही कंपनियां आगे रहेंगी, जो स्केल के साथ-साथ निष्पादन में उत्कृष्टता, पारदर्शिता और सतत विकास को अपनी रणनीति का केंद्र बनाएंगी। अगले 12 महीने ईपीसी सेक्टर के लिए इसी कसौटी पर भविष्य की दिशा तय करने वाले साबित होंगे।
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