SIR पर लोकतंत्र के मूक प्रहरी गरज उठे — निर्वाचन कर्मियों ने भारत निर्वाचन आयोग से हक की पुकार,  तुरंत कार्रवाई की मांग

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निर्वाचन कर्मियों की आवाज़ बुलंद — न्यायोचित मांगों पर ठोस कदम की अपेक्षा”लोकतांत्रिक देश के प्रहरी बोले — “हमारी निष्ठा का सम्मान हो”

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नई दिल्ली/आगरा। लोकतंत्र की जड़ों को सशक्त करने में दिन-रात जुटे निर्वाचन कर्मियों की समस्याओं और मांगों को लेकर निर्वाचन कर्मचारी वेलफेयर समिति, उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर सशक्त प्रस्तुति दी है। समिति के प्रदेश महामंत्री मानवेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि कुमार सक्सेना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपकर सभी निर्वाचन कार्मिकों—विशेषतः BLO, सुपरवाइजर और संबंधित कर्मियों की कठिनाइयों को विस्तारपूर्वक रखा।
निर्वाचन आयोग ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।

प्रतिकर अवकाश की बहाली और मानदेय में निष्पक्ष वृद्धि की मांग

समिति ने 26 जुलाई 1973 के शासनादेश का हवाला देते हुए सार्वजनिक अवकाशों में कार्य करने वाले कर्मियों को प्रतिकर अवकाश (कम्पेन्सेटरी लीव) की पुनः बहाली की मांग की है।

इसके साथ ही BLO तथा सुपरवाइजर जैसे जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों के अल्प मानदेय में यथोचित वृद्धि करने की भी पुरजोर अपील की गई ताकि वे मनोबल और सम्मान के साथ अपनी सेवाएँ दे सकें।

दुर्घटना बीमा, चिकित्सा सुविधा और तकनीकी सहयोग की गुहार

समिति ने निर्वाचन कार्य के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होने वाले कर्मियों के लिए नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा और आकस्मिक मृत्यु की दशा में कम से कम 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग रखी।

इसके अतिरिक्त प्रत्येक BLO एवं सुपरवाइजर को कार्यसुविधा हेतु टैबलेट, इंटरनेट रिचार्ज हेतु धनराशि और वाहन भत्ता देने का प्रस्ताव किया गया, जिससे उनके कार्य की दक्षता और गतिशीलता में वृद्धि हो सके।

अतिरिक्त दायित्वों से मुक्ति और ड्यूटी में पारिवारिक संतुलन

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि निर्वाचन कार्य के समय BLO व सुपरवाइजर को अन्य विभागीय जिम्मेदारियों से मुक्त रखा जाए ताकि वे एकाग्रता के साथ अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर सकें।

साथ ही पति-पत्नी दोनों को एक साथ निर्वाचन ड्यूटी में न लगाए जाने संबंधी आदेशों के कड़ाई से पालन की भी मांग की गई, जिससे पारिवारिक संतुलन बनाकर रखा जा सके।

SIR कार्य की समयसीमा बढ़ाने और विशेष भत्ते की मांग

समिति ने स्पष्ट किया कि SIR (Special Intensive Revision) कार्य 4 नवंबर से प्रारंभ होकर 4 दिसंबर तक निर्धारित है, किंतु कई जनपदों में प्रशिक्षण और दस्तावेज कार्य समय से पूर्ण नहीं हो सका। ऐसे में समिति ने आयोग से विनम्र अनुरोध किया है कि कार्य पूर्ण करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर तक बढ़ाई जाए। साथ ही सभी BLOs को SIR कार्य हेतु विशेष प्रोत्साहन स्वरूप 6000 रुपये की राशि प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है।

संपादकीय

लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने वाले कर्मियों का सम्मान सबका दायित्व

निर्वाचन कर्मचारी वेलफेयर समिति उत्तर प्रदेश ने जिस गंभीरता और दृढ़ता के साथ निर्वाचन कर्मियों की आवाज़ को शासन के उच्च स्तर तक पहुँचाया है, वह प्रशंसनीय है। लोकतंत्र की इस बुनियादी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने में ये कर्मी अनवरत परिश्रम करते हैं, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हों। उनका यह समर्पण केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति सेवा और सच्ची निष्ठा का प्रतीक है।

प्रेस ने इस मुद्दे को जिस निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ सामने रखा है, वह जनहित पत्रकारिता की सशक्त मिसाल है। निर्वाचन कर्मचारी वेलफेयर समिति उत्तर प्रदेश और उसके पदाधिकारियों द्वारा उठाई गई समस्त मांगें तर्कसंगत और व्यावहारिक हैं — जिन पर शासन को शीघ्र निर्णय लेकर कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना चाहिए।

— डॉ. भानु प्रताप सिंह, संपादक

Dr. Bhanu Pratap Singh