नई दिल्ली, अप्रैल 25: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने देश को एक बार फिर भय, दुख और क्रोध से भर दिया। चार सशस्त्र आतंकवादियों ने बैसरन घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस नृशंस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, जबकि 17 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हमला बीते दो दशकों में आम नागरिकों पर किया गया सबसे घातक हमला माना जा रहा है।
इस वीभत्स घटना पर हरिद्वार स्थित मिश्री मठ के तृतीय मठाधीश, पूर्ण गुरु श्री करौली शंकर महादेव जी ने गहरा शोक और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंनेs कहा:
“पहलगाम की इस अमानवीय त्रासदी ने मानवता की आत्मा को झकझोर दिया है। निर्दोष पर्यटकों की हत्या एक कायराना और निंदनीय कृत्य है। यह हमारे सामाजिक और मानवीय मूल्यों पर सीधा आघात है। दरबार इस जघन्य नरसंहार की घोर निंदा करता है और पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।”
गुरु श्री करौली शंकर महादेव जी का मानना है कि यह केवल एक आतंकी हमला नहीं, मानवता के विरुद्ध किया गया घोर अपराध है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हिंसा और नफरत का स्थायी समाधान केवल आध्यात्मिक जागरूकता और आत्मिक उत्थान में निहित है।
देश भर के अन्य धार्मिक और आध्यात्मिक नेताओं ने भी इस हमले की तीव्र निंदा की है। उनका स्पष्ट मत है कि आतंकवाद का उद्देश्य समाज में डर और अस्थिरता फैलाना है, जिसे एकजुट होकर और सख्ती से जवाब देना होगा।
नेताओं ने जनता से भी अपील की है कि वे इस समय नफरत और हिंसा से दूर रहकर मानवता, एकता और करुणा के मूल्यों को मजबूत करें।
निष्कर्ष
जब राष्ट्र पीड़ा से कराह रहा हो, ऐसे समय में आध्यात्मिक नेतृत्व से आने वाला यह संदेश—शांति, सहिष्णुता और मानवता की राह पर चलने का—अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्री करौली शंकर महादेव जी का यह आह्वान हमें याद दिलाता है कि धर्म का मूल उद्देश्य केवल पूजा नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता के साथ खड़ा होना भी है।
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