आगरा:- पुलिस कमिश्नर जे रविंद्र गौड़ के आदेश के बाद थाना ट्रांसयमुना प्रभारी भानु प्रताप सिंह ने फरियादियों की सुनवाई से पहले उनसे नमस्कार का संबोधन किया। फिर शिकायत सुनी।
ट्रांसयमुना थाना प्रभारी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि – पुलिस कमिश्नर के आदेश के अनुसार सभी फरियादियों से पहले नमस्कार का संबोधन किया जा रहा है। फिर उन्हें बिठाकर उनकी शिकायतें सुनी जा रही हैं । पीड़ितों के साथ आने वाले बच्चों के लिए चॉकलेट और टॉफियो की व्यवस्था भी की गई है।
पिढौरा थाने में प्रभारी को हाथ जोड़े देख चौंक गया फरियादी
-नीरज परिहार- पिनाहट। आगरा कमिश्नरेट में पुलिस का नया चेहरा देखने को मिल रहा है। यह पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ की पहल का ही असर है कि थाने पहुंचने वाले फरियादियों को सुखद अनुभूति हो रही है। हालांकि बहुत से लोग तो पुलिस के इस बदले रूप को देख सहम भी जाते हैं। लोगों का चौंकना स्वाभाविक है क्योंकि पुलिस ने अपनी छवि ही ऐसी बना रखी थी कि आम लोगों को थाने में प्रवेश करने में भी डर लगता था।
पुलिस आयुक्त के निर्देशों के बाद अब थाने में जो भी फरियादी पहुंचता है, ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मी उससे कुर्सी से खड़े होकर नमस्कार करता है। थाना पिढौरा में मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। थाने में पहुंचे एक फरियादी को थाना प्रभारी हरीश कुमार शर्मा ने आदर सत्कार के साथ नमस्कार का संबोधन दिया और अपने कार्यालय में कुर्सी पर बिठाया। पहले चाय पिलवाई और फिर फरियादी की समस्या सुनी।
फरियादी की बात सुनने के बाद थाना प्रभारी ने मातहतों को निर्देशित किया कि इनकी शिकायत पर अभियोग पंजीकृत कर तत्काल कार्यवाही करें। फरियादी की रिपोर्ट तत्काल दर्ज की गई। पुलिस के इस बदले हुए रूप को देख इस फरियादी को भरोसा नहीं हो पा रहा था कि सचमुच पुलिस बदल गई है।
पुलिस आयुक्त जे रविंद्र गौड़ ने पिछले दिनों ही सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया था कि थाने में पहुंचने वाले फरियादी को ड्यूटी पर मौजूद अधिकारी नमस्कार कर उसे समुचित आदर दे और फिर उसकी समस्या का समाधान करे। थानों में इस पर अमल शुरू हो चुका है। पुलिस आयुक्त ने अपने इस निर्देश का अनुपालन कराने के लिए पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी निर्देशित किया हुआ है।
आम तौर पर पुलिस ने अपनी ऐसी छवि बना रखी थी कि सज्जन लोग थाने जाने से डरते थे। लोगों को लगता था कि पुलिस के रूखे व्यवहार और गाली गलौज वाली भाषा सुनकर उन्हें अपमानित होना पड़ सकता है, इसलिए लोग थाने जाने से बचते थे। पुलिस आयुक्त ने महकमे की इसी छवि को बदलने के लिए यह पहल की है।
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