लोकसभा में संविधान पर चर्चा शुरू हो गई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी शुरुआत की. उन्होंने कहा कि अब देश में राजा रानी का शासन नहीं था और न तो ब्रिटिश तंत्र था, बल्कि लोकतंत्र था. उन्होंने कहा कि हमारा संविधान सभी पहलुओं को छूते हुए राष्ट्रनिर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है. संविधान ने प्रजा को नागरिक बनाया. लोगों को सरकार चुनने का हक दिया.
उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बगैर कहा कि एक पार्टी ने संविधान निर्माण की प्रक्रिया को हाईजैक करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि हमारा संविधान किसी एक पार्टी की देन नहीं है. भारत के लोगों के द्वारा, भारत के लोगों के अनुरूप बनाया गया दस्तावेज है. पश्चिमी सभ्यता में नाइट वॉचमैन स्टेट का कॉन्सेप्ट है. इसका अर्थ है कि सरकार का दायित्व लोगों को सुरक्षा प्रदान करने तक ही सीमित रहे. हमारे देश में राजधर्म की बात कही गई है. हमारे यहां राजा भी राजधर्म से बंधा हुआ है. उसकी शक्तियां लोगों के कल्याण के लिए है. कमजोर वर्गों की रक्षा के लिए है. हमारा संविधान नागरिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. हमारा संविधान नागरिकों के समग्र विकास में रास्ते में आने वाली बाधाओं को हटाने का निर्देश देता है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज संविधान की रक्षा की बात की जा रही है. लेकिन यह समझना जरूरी है कि किसने संविधान का अपमान किया है और किसने सम्मान किया है. उनका इशारा साफ तौर पर कांग्रेस की ओर था. रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी का नाम लिये बिना कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता संविधान की प्रति जेब में रखकर घूमते हैं. उन्होंने बचपन से यही सीखा है. संविधान को जेब में रखकर घूमना ही सीखा है. लेकिन भाजपा ने संविधान को माथे से लगाया है. हमने कभी भी किसी भी संस्था के साथ खिलवाड़ नहीं किया. संविधान के मूल्य हमारे लिए कहने या दिखाने भर की बात नहीं है. कहा कि संविधान के मूल्य संविधान द्वारा दिखाया गया मार्ग, सिद्धांत हमारे मन, वचन और कर्म में दिखाए देंगे.
राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारा संविधान प्रगतिशील, समावेशी, परिवर्तनकारी है. हमारे संविधान ने एक ऐसे समाज केनिर्माण का ब्लूप्रिंट दिया है, जिसमें समरसता और समृद्धि हो. यहां देश के शीर्ष पद को प्राप्त करने के लिए जन्म की पहचान मायने न रखती हो. जहां एक गरीब परिवार में जन्गा व्यक्ति प्रधानमंत्री बन सके. राष्ट्रपति बन सके. संविधान की मूल भावना को आजादी के बाद ही ताक पर रख दिया गया था. लेकिन हमारी सरकार ने इस सच्चे मन से स्वीकार किया है.
हमारी सरकार संविधान की मूल भावना को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है. हमने तीन नए आपराधिक कानूनों को पारित किया है. हमारी सरकार समाज के सभी वर्गों और विशेषकर कमजोर वगों के विकास को अपना लक्ष्य बनाया है. रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के हमारे लक्ष्य ने भारत को आगे लाकर खड़ा कर दिया है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि महिला सशक्तिकरण में हमारी सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. हगने नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी पास किया है. इससे राजनीतिक क्षेत्र की महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा. इसी सोच के तहत हमारी सरकार ने 2018 में राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया है. आजाद भारत में ये पहली बार हुआ. हमने 2019 में संवैधानिक संशोधन किया, ताकि आर्थिक आधार पर आरक्षण मिले.
समग्र और समावेशी विकास के सभी काम हमारे संवैधानिक मूल्यों और आदशों के जीवंत रूप हैं. हमने न सिर्फ संविधान के मूल्यों को केंद्र में रखकर काम किया है, बल्कि लागू भी किया है. इस देश में एक ऐसा राज्य भी था, जहां संविधान लागू नहीं होता था. संसद के कानून भी लागू नहीं होते थे. हमने वहां भी लागू करके दिखाया है. आज पूरा देश उस निर्णय का सकारात्मक परिणाम देख रहा है. हाल में चुनाव संपन्न हुए हैं. हिंसा की एक भी घटना नहीं हुई है.
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