आचार्य विश्व रत्न सागर महाराज

आचार्य श्री विश्व रत्न सागर ने आगरा के जैन समाज को झकझोरा, परमात्मा को कैदखानों से मुक्त कराओ, एक रुपया से लेकर करोड़ों रुपये की जरूरत है तो मुझे बताओ

RELIGION/ CULTURE
  • ऋग्वेद के अनुसार जैन धर्म प्राचीनतम लेकिन पंथवाद और गच्छवाद ने खोखला कर दिया हैः आचार्य श्री विश्व रत्न सागर महाराज
  • धर्म का म मोक्ष और धन का न नरक का प्रतीक, धन-धन करते एक दिन निधन हो जाता हैः कीर्ति रत्न सागर महाराज
  • जीवन की गाड़ी धर्म के बिना नहीं चलती, गुरु का साथ छह मिनट भी मिल जाए तो जीवन सफलः पूजा ज्योति महाराज

 

Live Story Time

Agra, Uttar Pradesh, India. Bharat. 2500 किलोमीटर लम्बा पदविहार करते हुए आगर आए आचार्य श्री विश्व रत्न सागर महाराज ने कहा कि संसार का प्राचीनतम धर्म जैन धर्म है। प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद में आदिनाथ, नमोकार मंत्र और भरत चक्रवर्ती की बात है तो ऋग्वेद पहले का है या जैन धर्म। भगवान आदिनाथ की श्यामवर्ण प्रतिमा नेशनल म्यूजियम दिल्ली में है।

आचार्य श्री विश्व रत्न सागर महाराज लोहामंडी स्थित पारस पर्ल्स अपार्टमेंट में प्रवचन कर रहे थे। बता दें कि आचार्य श्री ने 6 वर्ष 20 दिन की आयु में जैन साधु की दीक्षा ली थी। वे अब तक 250 जैन मंदिरों की स्थापना कर चुके हैं। चार राज्यों को छोड़कर पूरे भारत और नेपाल का पदविहार कर चुके हैं। जैन तीर्थ पालीतना में अपने गुरुदेव की स्मृति में 25 करोड़ की लागत से सात मंजिला धर्मशाला बनवाई है। वे यूं तो मंदिर परंपरा के साधु हैं लेकिन उनके अधिकांश अनुयायी स्थानकवासी हैं।

आचार्य श्री ने कहा कि आगरा के जैन समाज को झकझोरा। उन्होंने जैन समाज में आपसी मतभेदों पर चिंता प्रकट की। कहा- जैन धर्म विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है। पंथवाद और गच्छवाद ने जैन धर्म को खोखला कर दिया है। इस दिशा में आत्मचिंतन की आवश्यकता है।

आचार्य श्री विश्व रत्न सागर महाराज आगरा में
आगरा के पारस पर्ल्स अपार्टमेंट में प्रवचन करते आचार्य श्री विश्व रत्न सागर महाराज।

उन्होंने कहा कि मैं यहां टॉर्चर करने नहीं बल्कि जगाने आया हूँ। आचार्य का काम है समाज को जाग्रत करना। मुट्ठीभर समाज है, अगर टांग खीचेंगे या गच्छवाद में रहेंगे तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आगरा का जितना जागरूक समाज मैंने नहीं देखा है।

आचार्य श्री ने कहा कि परमात्मा को कैदखानों से मुक्त कराएं। एक रुपया से लेकर करोड़ों रुपये की जरूरत है तो मुझे बताएं। न तो मुझे शिलापट्टिका लगानी है और न ही लोकार्पण करना है। 250 मंदिरों की स्थापना कर चुका हूँ   और क्या चाहिए।

उन्होंने कहा कि 6 जुलाई, 2024 को महामांगलिक है। मंदिर मार्गीयों को श्रद्धा नहीं है लेकिन स्थानक परंपरा में बहुत महत्व है। दोपहर 12 बजे से भरतपुर में कार्यक्रम है। इसमें सबको आना है।

आगरा का जैन समाज
प्रवचन सुनने में लीन आगरा का श्वेताम्बर जैन समाजय़

उन्होंने श्रावकों के अंदर बैठे आत्मा रूपी परंपरा को नमन किया। साथ ही रोबिन जैन को भामाशाह बताया। संदेश जैन की अनुमोदना की। इन दोनों महानुभावों की प्रेरणा से ही पारस पर्ल्स अपार्टमेंट में प्रवचन हुए हैं। वैसे प्रवचन जैन दादाबाड़ी, शाहगंज में होना था। आचार्य श्री को बताया गया कि मुकेश जैन ने पारस पर्ल्स में एक फ्लैट जैन संतों के लिए आरक्षित कर रखा है।

आचार्य श्री के शिष्य कीर्ति रत्न सागर महाराज ने कई कथाएं सुनाईं। उन्होंने उदायन मंत्री की कथा सुनाई। उदायन ने युद्ध में सबकुछ जीत लिया। मृत्यु से पहले जैन साधु के दर्शन की इच्छा व्यक्त की। उनके पुत्र जैन साधु की खोज में निकले तो उन्हें बहुरुपिया मिला। उसे पैसे देकर जैन साधु बनाया और पिता के सामने लाए। उदायन ने उनके पैर पकड़े, नमोकार मंत्र सुना और प्राण त्याग दिए। इसके बाद बहुरुपिया ने जैन साधु का रूप नहीं त्यागा। यह प्रताप है जैन साधु के वस्त्रों का।

पूजा ज्योति महाराज
आचार्य श्री विश्व रत्न सागर महराज और पूजा ज्योदित महारा।

उन्होंने कहा कि तीर्थंकर की अनुपस्थिति में आचार्य भगवंत को ही तीर्थंकर की उपमा दी गई है।  धर्म का म मोक्ष और धन का न नरक का प्रतीक है। धन-धन करते एक दिन निधन हो जाता है।

साध्वी पूजा ज्योति महाराज ने कहा कि जिस तरह बारिश में गाड़ी बिना वाइपर के नहीं चल सकती है, उसी तरह जीवन की गाड़ी धर्म के बिना नहीं चलती है। गुरु का साथ छह मिनट भी मिल जाए तो जीवन धन्य हो जाता है।

जैन साध्वी पूजा ज्योति
प्रवचन करतीं जैन साध्वी पूजा ज्योति महाराज।

संपादक बृजेंद्र लोढ़ा के संचालन में यह कार्यक्रम जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ ने कराया। गौतम प्रसादी का लाभार्थी आयोजन दिनेश कुमार, रोबिन कुमार छजलानी रहे। श्रीसंघ के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार जैन, विजय सेठिया, स्थानकवासी समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन, सुनील कुमार जैन, कमलंचद जैन, संदेश जैन, कीर्ति लोढ़ा, दुष्यंत जैन, दिनेश चौरड़िया, केके कोठारी, सुशील जैन, अशोक कोठारी, प्रमोद, गौरव ललवानी, विनीत गोलेछा, शैलेंद्र बरड़िया, दीपक धारीवाल, अंकित पाटनी, मोहित वोहरा समेत बड़ी संख्या में श्रावक और श्राविकाएं उपस्थित थे।

दादाबाड़ी को संवारने वाली जैन साध्वी शशिप्रभा का दुर्घटना में निधन, शोक की लहर, चातुर्मास के बाद 50-60 साधुओं की मौत, यह राष्ट्रीय आपदा

Dr. Bhanu Pratap Singh