लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बेहद तीखा राजनीतिक हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने देश की बैंकिंग व्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताई और सरकार से सीधे तौर पर 12 कड़े सवाल पूछे हैं। अखिलेश यादव ने कड़े शब्दों में आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने देश की बैंकिंग प्रणाली को ‘सूदखोरी’ से भी ज्यादा बदतर और भयावह बना दिया है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि जो भाजपा सरकार वर्ष 2014 से लगातार बड़े-बड़े बैंकिंग सुधारों के दावे करती आ रही है, वह पिछले 12 वर्षों में बदहाल हो चुकी बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े अनगिनत सवालों में से केवल निम्नलिखित 12 बिंदुओं पर जनता के सामने अपनी सफाई पेश कर दे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन सवालों के जवाब दे देती है, तो बैंकिंग की जटिल समस्याओं और लूट से जूझ रही आम जनता को कुछ हद तक तसल्ली जरूर मिल जाएगी।
अखिलेश यादव के ‘बारह साल, बारह सवाल’:
1. खाते में पेनल्टी लगाकर आम जनता के पैसे काटने की अरबों रुपयों की लूट भाजपा सरकार ने क्यों करी?
2. विभिन्न सेवाओं जैसे SMS का पैसा, ATM का पैसा, खाता रखने का पैसा – हर महीने नये चार्ज के नाम पर मनचाही वसूली भाजपा ने क्यों शुरू करी? छोटे क़र्ज़दारों के घरों पर कुछ हज़ार रूपये के लिए वसूली एजेंट भेजकर, छोटे क़र्ज़दारों को बदनाम क्यों किया? दूसरी तरफ़ अरबपतियों के खरबों रुपए के लोन ले-देकर माफ़ करने का भ्रष्टाचार क्यों किया?
3. बुज़ुर्गों और पेंशन के जमा पैसे पर मिलनेवाले ब्याज पर अपना जीवनयापन करनेवाले मजबूर लोगों के हाथ में आनेवाले उस पैसे को क्यों कम किया जो उन्हें ब्याज के रूप में मिलता था। ब्याज दरों में कमी क्यों करी?
4. नोटबंदी के नाम पर नोटबदली का खेल खेलकर बैंकिंग सिस्टम को भ्रष्ट क्यों किया? आम जनता और बुज़ुर्ग महिलाएं तक अपने बचाए हुए पैसे बदलने के लिए लाइन में क्यों लगाया। इसके विपरीत अंदर पिछले दरवाजे से सेट कमीशन से काला धन सफेद क्यों करा गया?
5. अचानक बैंक के लॉकर से जनता की बहुमूल्य धातुएं, निवेश के प्रमाणपत्र व अन्य धरोहर आदि पिछले 12 सालों में ही क्यों गायब होने लगी। लॉकर-एग्रीमेंट के नाम पर जनता से स्टांप पेपर्स के ज़रिये करोड़ों की वसूली क्यों करी गयी? लॉकर का भाड़ा हर साल बढ़ा क्यों देते हैं? कई सालों का किराया एडवांस क्यों लेते हैं, पर चोरी हो जाने पर केवल 5 लाख रुपए लौटाने तक की ही गारंटी क्यों होती है?
6. बार-बार KYC का नाटक करके जनता के पैसे फँसाने का रहस्य क्या है? ऑनलाइन केवाईसी के फ़ेल होने की वजह क्या है? KYC के बिना खाता बंद करने का डर क्यों दिखाया जाता है? बुज़ुर्गों के फिंगर प्रिंट व आइरिस न मिलने के कारण केवाईसी न हो पाने की दिक़्क़त का जबाव कौन देगा? इस वजह से जिनकी पेंशन रुक जाती है, जिनका जमा पैसा फंस जाता है वो बेचारे क्या करें?
7. जानबूझकर बैंक को बीमार क्यों किया गया है? स्टाफ़ पर कामचोरी का आरोप लगाकर ईमानदार और सत्यनिष्ठ बैंक कर्मचारियों को योजना बनाकर क्यों बदनाम किया गया? सर्वर डाउन है, प्रिंटर ख़राब है, ओटीपी नहीं आ रहा, आज काम बहुत है कल आइएगा जैसी समस्याओं के नाम पर सालों से विश्वसनीय बैंकों को कमज़ोर क्यों किया गया और कमीशन लेकर बैंक बेचने का जुगाड़ क्यों किया गया?
8. डिजिटल बैंकिग के नाम पर जनता की परेशानी की कहीं कोई सुनवाई क्यों नहीं है? ऑनलाइन पैसा कट जाने, बैंकिग फ़्राड होने पर कोई भी सीधे बात करनेवाला क्यों नहीं रखा जाता है? कस्टमर केयर पर फोन क्यों नहीं लगता है और पैसे कट जाने के बाद पैसा लौटाने के लिए कोई ज़िम्मेदार क्यों नहीं है? भोले-भाले लोगों के खातों का फ़्राड के लिए दुरुपयोग करने के लिए कोई सुरक्षा कवच और जागरूकता अभियान क्यों नहीं चलाया जाता है?
9. आम जनता बच्चों की पढ़ाई, घर के लिए, काम-कारोबार को बढ़ाने के लिए कुछ लाख का लोन लेने के लिए आधार, पैन, गारंटर, CIBIL के चक्कर में फँसकर बैंकों के चक्कर काटती रहती है और कुछ भ्रष्ट लोग मिलीभगत कर बैंकों से अरबों रुपए का लोन आसानी से लेकर फ़रार भी हो जाते हैं। लोन में ऐसा भेदभाव क्यों?
10. खाता खुलवाने के नाम पर ज़बरदस्ती बीमा बेचने का लाभ किसकी जेब में जाता है? खाता खोलने के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी, क्रेडिट कार्ड लेने व एफ़डी करवाने का दबाव क्यों बनाया जाता है?
11. सरकार बैंक के कर्मचारियों की कार्यदशाओं और सेवा शर्तों, त्रस्त ग्राहकों की खीझ का सामना करने से जुड़ी माँगों को नज़रअंदाज़ क्यों करती है? इस वजह से बैंककर्मियों को हर बार हड़ताल क्यों करनी पड़ती है? बैंककर्मियों के साथ सहानुभूति का रवैया क्यों नहीं अपनाया जाता है? सच तो ये है कि शहरी हो या ग्रामीण बैंकिग की समस्याएं सबकी शिकायतों और जन-आक्रोश का सामना उन्हें ही करना पड़ता है, जिसके कारण कभी-कभी अपमानजनक और हिंसक हालात पैदा हो जाते हैं। भाजपा सरकार बैंक के ग्राहकों और बैंक में काम करनेवालों की घोर उपेक्षा करते हुए उनके प्रति तिरस्कारपूर्ण शर्मनाक निंदनीय व्यवहार क्यों करती है?
12. भाजपाइयों ने ‘जन-धन खाता’ खुलवाने वाले शोषित-वंचित-निर्धन ‘पीडीए समाज’ से ठगी क्यों करी? जीरो बैलेंस खाते के नाम पर, ग़रीबों के खाते से पेनल्टी-चार्ज काटकर उनके खातों को माइनस में ले जाकर, ग़रीबों पर क़र्ज़दार होने का ठप्पा क्यों लगाया? आम जनता की जागरूकता के लिए सच में समझ आनेवाले ‘वित्तीय साक्षरता अभियान’ सरल भाषा में क्यों नहीं शुरू करती है? क्या लोगों को बैंकिंग की समझ पैदा न हो और उन्हें यूँ ही लगातार ठगा जाता रहे, यही भाजपा सरकार की असली मंशा है? ‘आपका खाता, भाग्यविधाता’ का जुमला फेंकनेवालों को अब जनता से सच कहना चाहिए ‘आपका खाता, देता घाटा’
अपनी बात के अंत में अखिलेश यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि जब भाजपा सरकार अपने इस 12 साल के कार्यकाल के इन 12 तीखे सवालों के संतोषजनक जवाब दे देगी, तो खस्ताहाल हो चुकी संपूर्ण बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े अन्य सैकड़ों गंभीर प्रश्न भी सिलसिलेवार तरीके से पूछे जाएंगे।
- आगरा में दशहरा शोभायात्रा से पहले घमासान: समिति गठन को लेकर भाजपा और सपा समर्थित गुट आमने-सामने, डीसीपी कार्यालय पहुंचा विवाद - October 15, 2026
- आगरा में साइबर ठगी के दो बड़े मामले: डिजिटल लॉक तोड़ने के बाद खाते से निकाले रुपये, तो एपीके लिंक से 9.80 लाख की चपत - October 15, 2026
- आगरा नगर निगम में कथित 100-200 करोड़ के ई-टेंडर घोटाले का मामला गर्माया: बसपा पार्षदों ने शासन स्तर से उच्चस्तरीय एसआईटी जांच की मांग उठाई - October 15, 2026