राष्ट्रीय पेनमैन चैंपियनशिप 2026 का भव्य पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न: खंदारी परिसर के जेपी सभागार में गूंजा श्रीमद्भगवद्गीता का 12वां अध्याय

PRESS RELEASE

स्वास्तिक हैंडराइटिंग वेलफेयर ट्रस्ट एवं केएमआई, डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय ने किया आयोजन

हस्तलेखन के साथ संस्कार और संस्कृति का संदेश, देशभर के प्रतिभागियों को किया सम्मानित

आगरा। स्वास्तिक हैंडराइटिंग वेलफेयर ट्रस्ट एवं कन्हैया लाल मानिक लाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ, डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता नेशनल पेनमैन चैंपियनशिप (एनपीसी) 2026 का पुरस्कार वितरण समारोह खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में संपन्न हुआ। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से प्रतियोगिता में शामिल हुए प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में हस्तलेखन कला के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा, आध्यात्मिक चेतना और दिव्यांग प्रतिभाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम अध्यक्ष एवं कुलपति प्रो. आशु रानी, मुख्य अतिथि डॉ. सुशील गुप्ता, विशिष्ट अतिथि डॉ. गिरधर शर्मा, डॉ. प्रांजल शर्मा, अनिमेष दयाल एवं शुभी दयाल, कार्यक्रम संयोजक प्रो प्रदीप श्रीधर, निदेशक कन्हैया लाल मानिक लाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ, स्वास्तिक हैंडराइटिंग वेलफेयर ट्रस्ट के संस्थापक शिशिर मित्तल एवं अध्यक्ष विनीता मित्तल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके पश्चात गणेश वंदना पर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने समारोह का वातावरण भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि हस्तलेखन केवल सुंदर लिखने की कला नहीं, बल्कि व्यक्ति के अनुशासन, धैर्य, एकाग्रता और व्यक्तित्व का प्रतिबिंब है। डिजिटल युग में हस्तलेखन की परंपरा को जीवित रखना और बच्चों को इससे जोड़ना सराहनीय प्रयास है।
मुख्य अतिथि डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि हस्तलेखन हमारी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करती हैं। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों को एक मंच पर लाना अपने आप में उल्लेखनीय प्रयास है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में लेखन का सदैव विशेष महत्व रहा है। आज जब जीवन तेजी से डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो रहा है, ऐसे समय में हस्तलेखन को प्रोत्साहित करना हमारी परंपरा को संरक्षित करने जैसा है।

स्वास्तिक हैंडराइटिंग वेलफेयर ट्रस्ट की अध्यक्ष विनीता मित्तल ने बताया कि वर्ष 2020 में कोविड काल के दौरान इस प्रतियोगिता का शुभारंभ ऑनलाइन स्तर पर पूरे देश में किया गया था। तभी से लगातार इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 6 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक के प्रतिभागी देश के विभिन्न राज्यों से हिस्सा लेते हैं। असम, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से प्रतियोगिता में सहभागिता की।

उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता की निर्णायक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिभागियों से उनकी कृतियों की वीडियो भी मंगवाई जाती है। प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका अशोक बत्रा, श्रुति सिन्हा, डॉ. मनोज कुमार, हर्षदा सलगांवकर, डॉ. मंजू गुप्ता, डॉ. आभा सिंह गुप्ता, डॉ. रुपाली खन्ना, दीप्ति जादौन, आरके कपूर, डॉ. सुनीता शर्मा, रितु गोयल एवं रीनू त्रिवेदी ने निभाई।

एक स्वर में गूंजा श्रीमद्भगवद्गीता का 12वां अध्याय

समारोह की सबसे विशेष एवं आध्यात्मिक प्रस्तुति के रूप में गीता मनीषी डॉ. मंजू गुप्ता के मार्गदर्शन में सभागार में उपस्थित सभी अतिथियों, बच्चों, प्रतिभागियों एवं दर्शकों से श्रीमद्भगवद्गीता के 12वें अध्याय का संस्कृत में सामूहिक पाठ कराया गया।

खचाखच भरे जेपी सभागार में जब सैकड़ों प्रतिभागियों और उपस्थित जनों ने एक साथ संस्कृत में श्रीमद्भगवद्गीता के 12वें अध्याय के श्लोकों का उच्चारण किया तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। बच्चों और युवाओं द्वारा एक स्वर में किए गए गीता पाठ ने समारोह को विशिष्ट बना दिया।

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए भक्ति योग के संदेश से जुड़े गीता के 12वें अध्याय का सामूहिक पाठ आयोजन की मूल भावना—लेखन के साथ संस्कार, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने—का प्रभावशाली उदाहरण बना। इस दौरान सभागार में मौजूद हर व्यक्ति ने श्रद्धा और एकाग्रता के साथ गीता के श्लोकों का पाठ किया।

इसके बाद नीरज कांत शर्मा के निर्देशन में दिव्यांग बच्चों द्वारा प्रस्तुत योग-नृत्य ने समारोह में चार चांद लगा दिए।

विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं ने लहराया परचम

इस वर्ष प्रतियोगिता में मिनिएचर गार्डन प्रतियोगिता को भी जोड़ा गया। इसमें जूनियर वर्ग में वेदांश मित्तल तथा सीनियर वर्ग में हेमलता सिंह प्रथम स्थान पर रहे।

इंग्लिश कर्सिव लेखन की विभिन्न श्रेणियों में जियांशु सिंह तोमर, दृष्टि गर्ग, आज्ञा शर्मा, मानवी चौधरी एवं निशा सोनी प्रथम स्थान पर रहे। इंग्लिश प्रिंट लेखन में भव्य गुप्ता, विवान कंसल, अनिरुद्ध चौधरी, अनुभव तिवारी एवं शिल्पी मित्तल, इंग्लिश स्लोगन लेखन में रितिक शर्मा, वेरोनिका सिंह, जानवी वर्मा एवं सारिका गुप्ता, इंग्लिश आर्टिस्टिक पैराग्राफ राइटिंग में श्रेयांश, सिद्धार्थ, वेरोनिका एवं एकता, इंग्लिश निबंध लेखन में निवेशिका गौतम एवं कमल कुमार शर्मा, हिंदी सुलेख में नक्षत्र, मालविका, राघव, कीर्ति एवं तन्मोय, संस्कृत श्लोक लेखन में यशिका, धुन, खुशबू, खुपनेजियम हरनखोल, हिंदी कलात्मक लेखन में मालविका, अनिरुद्ध एवं सायरा, हिंदी निबंध लेखन में अनविका, पीहू एवं तन्मोय, ड्राइंग एंड पेंटिंग में जियांशु, रिद्धि, रिद्धिमा, विप्रांश एवं ऐश्वर्या, लिप्पन आर्ट में डॉ. श्वेता अग्रवाल, मंडला में स्तुति एवं रुचिका, जबकि मधुबनी एवं कोलाज में स्तुति एवं ऐश्वर्या प्रथम रहे।

इन्होंने संभाली व्यवस्था

कार्यक्रम का संचालन श्रुति दास, अंशिका मित्तल एवं रिया गौतम ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सफल बनाने में अंजलि, राधिका, रुचि, शिखा, महक, क्षमा, मधुलिका, प्रेरणा, एकता, गीत, निधि, ज्योति, पल्लवी, रेनू, चर्चित, युगाद्या, निवेशिका, रिद्धि, प्रशंसा, रायना, वंशिका आदि योगदान रहा।

Dr. Bhanu Pratap Singh