​राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: एसआईटी की जांच तेज, मुख्य ट्रस्टी समेत 50 लोगों से हुई पूछताछ; सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ के संकेत

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अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की धनराशि में कथित गबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जांच के सिलसिले में गुरुवार को मुख्य ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र से भी एसआईटी ने पूछताछ की। पिछले तीन दिनों के भीतर एसआईटी अब तक 50 से अधिक लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिससे ट्रस्ट और दान प्रबंधन से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।

सीसीटीवी फुटेज में छेड़छाड़ की आशंका

जांच प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की टीम द्वारा खंगाले जा रहे सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। टीम इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि फुटेज के साथ किसके इशारे पर और क्यों छेड़छाड़ की गई। इसके अलावा, एसआईटी को दान के प्राप्त रिकॉर्ड्स और वास्तविक गणना के बीच भारी विसंगतियां मिली हैं।

सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान कई संबंधित व्यक्ति संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं और उनके द्वारा दिए गए गोलमोल उत्तर जांच की दिशा को और अधिक जटिल बना रहे हैं। रिकॉर्ड्स में अस्पष्टता के चलते एसआईटी को अब पूरी प्रक्रिया को डीकोड करने में अधिक समय लग रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे पर सबकी नजरें

इस संवेदनशील घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शुक्रवार को अयोध्या आगमन प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री राम मंदिर में दर्शन करने के साथ ही स्थिति का जायजा भी लेंगे। चर्चा है कि एसआईटी की टीम इस मामले में अपनी अब तक की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप सकती है। राज्य सरकार ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश भर के करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा विषय है।

विपक्ष का हमला और जनता की मांग

​राम मंदिर चढ़ावे के गबन के आरोपों ने विपक्षी दलों को भी सरकार पर हमलावर होने का मौका दे दिया है। विपक्ष लगातार पारदर्शिता और ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल खड़े कर रहा है। वहीं, स्थानीय जनता और श्रद्धालु भी इस बात को लेकर बेहद नाराज हैं। लोगों का कहना है कि भगवान राम के नाम पर आए दान में हेराफेरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

Dr. Bhanu Pratap Singh