लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल बजने में भले ही अभी काफी वक्त बाकी हो, लेकिन सूबे के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी अभी से तेज हो गई है। राजनीतिक दलों ने न केवल अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं, बल्कि गठबंधन के भीतर अपनी सौदेबाजी की क्षमता (प्रेशर पॉलिटिक्स) को भी धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, ओमप्रकाश राजभर की अगुवाई वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सामने बड़ा प्रस्ताव रखते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में 35 से 40 सीटों की मांग कर दी है। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी इच्छा जताई है कि चुनाव के बाद एनडीए की सरकार बनने पर सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर को उत्तर प्रदेश का उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाया जाए।
35 से 40 सीटों पर तैयारी और संगठन विस्तार का दावा
पार्टी प्रवक्ता सुभाष चंद्र यादव का कहना है कि हम 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर 16 सीटों पर चुनाव लड़े थे, इस बार 35 से 40 सीटों पर मजबूत तैयारियों के साथ विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि उम्मीद है कि बीजेपी (BJP) कम से कम 25 सीटें जरूर देगी, फिलहाल हम 35 से 40 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. पार्टी ने 80 सीटों पर अपना संगठन मजबूत कर रखा है। प्रवक्ता ने बताया कि पार्टी ने 63 सीटों पर प्रभारी भी नियुक्त कर दिए हैं। पार्टी प्रवक्ता सुभाष चंद्र यादव का कहना है कि 2017 में सुभासपा 10 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जबकि 2022 में 16 सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए थे। हर चुनाव में ताकत के हिसाब से सीटों की बढ़ोतरी की जाती है। उनके मुताबिक ओमप्रकाश राजभर और सुभासपा प्रेशर पॉलिटिक्स नहीं करती है।
डिप्टी सीएम पद को लेकर कार्यकर्ताओं की बड़ी इच्छा
उन्होंने कहा लेकिन हमारी पार्टी इस समय जितनी मजबूत है, उसके हिसाब से गठबंधन की बैठक में 35 से 40 सीटों की मजबूती के बारे में बताया जाएगा। इसके अलावा हमारी पार्टी के कार्यकर्ता यह भी चाहते हैं कि 2027 में एनडीए की सरकार बनने पर ओमप्रकाश राजभर को डिप्टी सीएम का पद भी दिया जाए।
प्रवक्ता सुभाष चंद्र यादव का यह भी कहना है कि वैसे तो पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा ओमप्रकाश राजभर को मुख्यमंत्री के तौर पर देखने की है, लेकिन हम एनडीए (NDA) का हिस्सा बनकर चुनाव लड़ेंगे। इसलिए हम चाहते हैं कि एनडीए की सरकार बनने पर ओमप्रकाश राजभर को डिप्टी सीएम का पद दिया जाए।
‘बीजेपी अकेले नहीं लड़ेगी चुनाव’
पार्टी प्रवक्ता के मुताबिक बीजेपी अकेले चुनाव नहीं लड़ेगी, बल्कि सीएम योगी दलों के साथ मिलकर एनडीए के तौर पर लड़ेंगे। इसलिए सभी की ताकत और इच्छा का सम्मान होना ही चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि सीटों की संख्या को लेकर कोई विवाद नहीं होगा और आपस में मिल बैठकर तय कर लिया जाएगा।
अब्बास अंसारी के राजनीतिक भविष्य पर सुभासपा का रुख
सुभासपा प्रवक्ता सुभाष चंद्र यादव ने माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी के चुनाव लड़ने को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अब्बास अंसारी अभी सुभासपा के ही विधायक हैं। हालांकि इन दिनों वह समाजवादी पार्टी के ज्यादा करीब हो गए हैं। ऐसे में अब्बास अंसारी को खुद तय करना है कि वह अपनी पुरानी पार्टी सुभासपा के सिंबल पर विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे या फिर किसी दूसरी पार्टी का दामन थामेंगे।
उन्होंने कहा कि वैसे तो अंसारी परिवार के ओमप्रकाश राजभर से हमेशा से बहुत अच्छे रिश्ते रहे हैं और दोनों के परिवारों में आज भी दोस्ताना संबंध कायम है। लेकिन निजी रिश्ते और राजनीति दोनों अलग-अलग हैं। इस बारे में फैसला खुद अब्बास अंसारी और उनके परिवार को लेना है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अब्बास अंसारी दोबारा हमारी पार्टी से लड़ते हैं तो ठीक नहीं तो हम उनके खिलाफ मजबूत प्रत्याशी खड़ा करेंगे और उन्हें हराने का काम करेंगे। प्रवक्ता का कहना है कि अब्बास अंसारी के लिए सुभासपा के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं, लेकिन फैसला उन्हें खुद लेना है।
ओवैसी की यूपी एंट्री पर क्या बोली सुभासपा?
वहीं यूपी विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री को लेकर बोले सुभासपा प्रवक्ता सुभाष चंद्र यादव ने कहा कि ओवैसी के चुनाव लड़ने या ना लड़ने से सुभासपा या एनडीए पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। इस बारे में फैसला इंडिया गठबंधन को लेना है। अखिलेश यादव और विपक्ष के दूसरे नेताओं को तय करना है कि उन्हें ओवैसी को अपने साथ रखना है या फिर वह अकेले ही चुनाव लड़ेंगे।
प्रवक्ता ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी की भी अपनी एक राजनीतिक पार्टी है और देश के एक नागरिक व दल के नेता के रूप में उन्हें चुनाव लड़ने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त है। इसलिए ओवैसी से जुड़ा पूरा मामला अब पूरी तरह से अखिलेश यादव और कांग्रेस के पाले में जा चुका है, और इस पर निर्णय उन्हें ही लेना होगा। सुभासपा के लिए ओवैसी किसी भी प्रकार का कोई बड़ा चुनावी फैक्टर नहीं हैं। बहरहाल, सुभासपा प्रवक्ता के इन तीखे और रणनीतिक बयानों ने एक बार फिर से यूपी की राजनीति का पारा गर्मा दिया है।
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