लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक घमासान अब लखनऊ की सड़कों पर भी उग्र रूप लेता नजर आ रहा है। रविवार को राजधानी लखनऊ के प्रशासनिक व ऐतिहासिक रूप से बेहद संवेदनशील हजरतगंज चौराहे पर उस समय भारी अफरा-तफरी, हाई-वोल्टेज ड्रामे और नारेबाजी का माहौल बन गया, जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सड़कों पर उतर आए। हालांकि, इस पूरे प्रदर्शन के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
हजरतगंज चौराहे पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जब भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा, तो वहां एक अनोखा वाकया घटित हुआ। प्रदर्शनकारियों के बीच मौजूद छोटे कद के एक अधेड़ सपा कार्यकर्ता अपने पूरे शबाब पर ‘लोकतंत्र की हत्या है, लोकतंत्र की हत्या है… ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ के नारे लगा रहे थे। उनके हाथों में एक बड़ा पोस्टर थमा हुआ था, जिस पर लिखा था: ‘गुस्से में है सारा देश, इस्तीफा दे दो ज्ञानेश!’
जब पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस बस में बैठाना शुरू किया, तो भीड़ के बीच मौजूद एक सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) ने उन अधेड़ सपा कार्यकर्ता को किसी बच्चे की तरह दोनों हाथों में गोद में उठा लिया और दौड़ते हुए पुलिस बस की तरफ ले गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि दरोगा की गोद में उठाए जाने के बाद भी कार्यकर्ता के तेवर जरा भी ढीले नहीं पड़े; वे लगातार मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और लोकतंत्र बचाने के पक्ष में हवा में हाथ लहरा-लहराकर बुलंद आवाज में नारेबाजी करते रहे।
दिल्ली के रामलीला मैदान से लखनऊ के हजरतगंज तक पहुंची लड़ाई
हजरतगंज चौराहे पर हुआ यह विरोध प्रदर्शन कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों के राष्ट्रीय स्तर पर जारी अभियान की अगली कड़ी है। रविवार को ही दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन और समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग व मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ ‘संविधान और लोकतंत्र बचाओ’ महारैली का आयोजन किया था।
2027 के यूपी रण से पहले गरमाया चुनावी माहौल
रामलीला मैदान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ जो सुर बुलंद किए गए थे, सपा कार्यकर्ता अब उसे उत्तर प्रदेश के हर जिले, कस्बे और चौराहे तक ले जाने की व्यापक रणनीति पर काम कर रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए जाने के मुद्दे को सपा एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में भुना रही है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार यह गंभीर आरोप लगाते आ रहे हैं कि स्थानीय चुनाव प्रशासन की कथित मिलीभगत से मतदाता सूचियों में हेरफेर करने का प्रयास किया जा रहा है
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का कहना था कि जब तक पूरी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं आ जाती और मुख्य निर्वाचन आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक उनका यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा। दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और पुलिस प्रशासन का कहना है कि समाजवादी पार्टी अपनी भावी हार की बौखलाहट में संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग पर बेबुनियाद आरोप लगाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है।
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