आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष के गौरवमयी अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय तृतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च एंड प्रैक्टिस’ (ICMRP-2026) का रविवार को गरिमामयी वातावरण में समापन हुआ। खंदारी परिसर स्थित जे.पी. ऑडिटोरियम में आयोजित समापन समारोह को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने शोध, शिक्षा और नवाचार को राष्ट्र के विकास का मूल आधार बताया।
उन्होंने कहा कि देश को ‘विकसित भारत’ बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में वैज्ञानिक अनुसंधान और अकादमिक शोध की निर्णायक भूमिका होगी। समारोह के दौरान शोधपत्र, पोस्टर प्रदर्शनी और वर्किंग मॉडल प्रतियोगिताओं के उत्कृष्ट विजेताओं को अतिथियों द्वारा पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने की, जबकि कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय मुख्य अतिथि और एडवोकेट दीपक माहेश्वरी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में रोहन उप्पल सहित शिक्षा जगत के अनेक गणमान्य विद्वान, शोधकर्ता और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
इस अंतरराष्ट्रीय ज्ञान समागम का आयोजन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड पैरामेडिकल साइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी विभाग और कृषि विभाग द्वारा ‘कौशांबी फाउंडेशन’ तथा ‘नीलम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस एंड हॉस्पिटल’ के विशेष सहयोग से किया गया।
”वैश्विक स्तर पर संवाद का सशक्त माध्यम हैं ऐसे सम्मेलन”
मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि अनुसंधान और नई सोच किसी भी प्रगतिशील समाज और राष्ट्र की रीढ़ होते हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले ऐसे बहुविषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन युवाओं और शोधार्थियों को अपने अनूठे विचार साझा करने, प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा वैश्विक स्तर पर अकादमिक संवाद स्थापित करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी के विकसित भारत के सपने को हकीकत में बदलने के लिए विश्वविद्यालयों में शोध संस्कृति को निरंतर बढ़ावा देना होगा।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह शताब्दी वर्ष केवल एक मील का पत्थर नहीं, बल्कि नई अकादमिक उपलब्धियों और संकल्पों का प्रतीक है। ICMRP-2026 ने दुनिया भर के विभिन्न विषयों के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और युवा शोधकर्ताओं को एक विचारशील मंच दिया है। ऐसे सम्मेलनों से न केवल उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आता है, बल्कि अंतःविषय (मल्टीडिसिप्लिनरी) शोध के नए आयाम भी खुलते हैं।
शोधपत्र, पोस्टर और वर्किंग मॉडल प्रतियोगिताओं में दिखा हुनर
सम्मेलन के तीनों दिनों में भारत और विदेश से आए प्रतिभागियों ने सतत विकास, नवोन्मेष, आधुनिक विज्ञान, शिक्षा, तकनीक और विभिन्न समसामयिक वैश्विक मुद्दों पर अपने शोध पत्र और निष्कर्ष प्रस्तुत किए। इस दौरान आयोजित शोधपत्र वाचन, पोस्टर मेकिंग और वर्किंग मॉडल मेकिंग प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बनता था। निर्णायक मंडल द्वारा चुने गए श्रेष्ठ प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि और मंचस्थ अतिथियों ने मेडल व सर्टिफिकेट देकर प्रोत्साहित किया।
इस सफल आयोजन के मुख्य संयोजक डॉ. मोनिका अस्थाना, डॉ. रवि शेखर और डॉ. प्रतिभा मिश्रा रहे। आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने में फार्मेसी विभाग की डॉ. स्वेतलाना, सह सचिव डॉ. गौरव रजौरिया, जीव विज्ञान विभाग के डॉ. अजीत चाहर, नीलम ग्रुप के पवन सिंह और कौशांबी फाउंडेशन के तुषार चौधरी, योशिल, कृष्णा शर्मा, यतिन वर्मा और ट्विंकल दीक्षित की सराहनीय भूमिका रही।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. स्वेतलाना ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन लक्ष्य चौधरी ने प्रस्तुत किया। अंत में आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, सहयोगी संस्थाओं, शोधार्थियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया।
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