लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं का दल-बदल का खेल जारी है, लेकिन सोमवार को प्रदेश की सियासत में एक अद्भुत और दिलचस्प राजनीतिक संयोग देखने को मिला। बदायूं जिले की दातागंज सीट से पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य ने सुबह समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्यता ग्रहण की, लेकिन शाम होते-होते भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उन्हें अपनी प्रदेश कार्यसमिति का नया सदस्य घोषित कर दिया। इस घटनाक्रम के सामने आते ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं और सवाल तेज हो गए हैं।
सुबह अखिलेश यादव के सामने थामी ‘साइकिल’
पूरा मामला सोमवार का है, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में भाजपा और बसपा (BSP) समेत विभिन्न प्रमुख राजनीतिक दलों के कई पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने सपा का दामन थामा। सपा मुख्यालय पर आयोजित इस कार्यक्रम में अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ ‘साइकिल’ पर सवार होने वालों में बदायूं की बिसौली (सुरक्षित) सीट से पूर्व विधायक कुशाग्र सागर, दातागंज से पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य, बदायूं के ब्लॉक प्रमुख कालीचरण उर्फ केसी शाक्य (पूर्व बसपा लोकसभा प्रत्याशी) प्रमुख रूप से शामिल रहे।
शाम को आई बीजेपी की सूची ने उड़ाए सबके होश
राजनीतिक कहानी में असली ट्विस्ट तब आया जब शाम को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने प्रदेश कार्यसमिति के नए सदस्यों की आधिकारिक सूची जारी की। इस नई सूची में जब लोगों की नजर 88वें नंबर पर पड़ी, तो वहां बदायूं से सिनोद कुमार शाक्य का नाम प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में दर्ज था।
सुबह सपा में सार्वजनिक तौर पर शामिल होने वाले नेता का नाम शाम को बीजेपी की शीर्ष सांगठनिक सूची में होने से हर कोई हैरान रह गया।
उठ रहे कई सियासी सवाल
इस अजब-गजब घटनाक्रम के बाद यूपी की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं छिड़ गई हैं। राजनीतिक जानकार अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या भारतीय जनता पार्टी को अपने वरिष्ठ नेता के समाजवादी पार्टी में जाने की भनक तक नहीं लगी थी, या फिर बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की सूची काफी पहले ही तैयार हो चुकी थी और उसे औपचारिक रूप से शाम को जारी किया गया? फिलहाल, इस घटनाक्रम ने 2027 के चुनाव से पहले बदायूं और पूरे प्रदेश के राजनीतिक पारे को और गर्मा दिया है।
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