उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के बेसिक शिक्षा विभाग से एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मामला सामने आया है। यहां शिक्षामित्रों के चयन से जुड़ी कुल 2143 फाइलें रहस्यमय तरीके से गायब हो गई हैं। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में कुल 2169 शिक्षामित्रों का चयन किया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि कार्यालय के पास महज 26 फाइलें ही सुरक्षित बची हैं। इस भारी गड़बड़ी और दस्तावेजों के गायब होने से विभाग के प्रशासनिक कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कोर्ट में जवाब देने में हो रही भारी कठिनाई
वर्तमान में कुछ शिक्षामित्रों के चयन और नियुक्ति से जुड़े मामले माननीय न्यायालय में विचाराधीन (लंबित) हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने विभाग से चयन से संबंधित मूल फाइलें तलब की हैं। हालांकि, कार्यालय में जरूरी फाइलें उपलब्ध न होने के कारण बेसिक शिक्षा विभाग को न्यायालय में अपना पक्ष रखने और जवाब दाखिल करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अदालती दस्तावेजों की कमी को देखते हुए प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर दर्ज हुई एफआईआर
इस पूरे प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी के स्पष्ट निर्देशों के आधार पर खंड शिक्षाधिकारी (BEO) रविप्रकाश ने सेवानिवृत्त पटल सहायक प्रदीप चौहान के विरुद्ध संबंधित कोतवाली में आधिकारिक रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है। पुलिस ने विभाग की तहरीर पर मामला दर्ज कर दस्तावेजों की तलाश और पूरे घटनाक्रम की गहन जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।
सेवानिवृत्त पटल सहायक ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, इस मामले में आरोपी बनाए गए सेवानिवृत्त पटल सहायक प्रदीप चौहान ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि वर्ष 2010 से 2021 तक वह शिक्षामित्र पटल का कार्य संभाल रहे थे और साल 2021 में सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) हुए थे।
प्रदीप चौहान का पक्ष है कि उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान फाइलों का कोई भी लिखित प्रभार (चार्ज) नहीं सौंपा गया था। उनके मुताबिक, उनके द्वारा तैयार की गई कुल 26 फाइलें पहले ही विभाग को विधिवत रूप से सौंप दी गई थीं।
इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सूर्य प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि विभागीय स्तर पर गायब फाइलों को लेकर पूर्व पटल सहायक को पहले भी कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
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