लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा पारदर्शी एवं निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से चयनित 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को लोक भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर नवचयनित अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस शुचिता, पारदर्शिता और बिना किसी सिफारिश या लेन-देन के उनका चयन केवल मेरिट के आधार पर हुआ है, उसी ईमानदारी के साथ वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। उनके पास आने वाले प्रत्येक फॉरेंसिक साक्ष्य की जांच पूरी शुद्धता, प्रामाणिकता और समयबद्धता के साथ होनी चाहिए। साक्ष्यों की विश्वसनीयता ही अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाने और निर्दोष के सम्मान की रक्षा करने का सबसे मजबूत आधार बनेगी।
सीएम योगी ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसे कानून के शिकंजे से बचने का कोई अवसर नहीं मिलना चाहिए, वहीं किसी भी निर्दोष के अधिकारों का हनन न हो—यह सुनिश्चित करना फॉरेंसिक विशेषज्ञों का नैतिक व कानूनी दायित्व है।
साक्ष्यों की कमी से बच निकलते हैं अपराधी; सीएम ने दिया महर्षि गौतम के न्याय दर्शन का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने भारत के ध्येय वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अदालत में सत्य की विजय तभी संभव है, जब जांच एजेंसियां पर्याप्त और अकाट्य साक्ष्य प्रस्तुत करें। उन्होंने भारतीय न्याय दर्शन के प्रणेता महर्षि गौतम का उल्लेख करते हुए बताया कि हजारों वर्ष पूर्व उन्होंने न्याय के लिए प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द प्रमाण—ये चार प्रकार के आधार बताए थे। यह प्राचीन ज्ञान आज की आधुनिक फॉरेंसिक जांच व्यवस्था में भी पूरी तरह प्रासंगिक है।
सीएम योगी ने एक दुर्दांत माफिया के बरी होने का उदाहरण देते हुए स्वीकार किया कि यूपी एसटीएफ द्वारा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश किए जाने के बावजूद कानूनी बारीकियों और प्रस्तुतीकरण की कमी के कारण वह बरी हो गया था। उन्होंने कहा कि यह हमारी भी कमी थी कि हमने महर्षि गौतम के न्याय दर्शन को अपनी व्यवस्था में पर्याप्त स्थान नहीं दिया। इसलिए वैज्ञानिक अधिकारियों का दायित्व केवल साक्ष्य जुटाना नहीं, बल्कि उन्हें अदालत में निर्णायक सिद्ध करना भी है।
नए आपराधिक कानूनों के तहत 600 से ज्यादा अधिकारी प्रशिक्षित
मुख्यमंत्री ने बताया कि जुलाई 2024 से देश में लागू किए गए तीन नए भारतीय आपराधिक कानूनों के तहत 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए प्रदेश में 500 फॉरेंसिक एविडेंस कलेक्टर्स की आवश्यकता के मुकाबले राज्य सरकार ने 600 से अधिक पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया है।
इसके अलावा, वर्ष 2017 से पहले भू-माफिया के कब्जे में रही भूमि को मुक्त कराकर स्थापित किए गए ‘उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस’ की चर्चा करते हुए सीएम ने कहा कि अब यह संस्थान एआई (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और क्वांटम फॉरेंसिक जैसे आधुनिक विषयों में प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र बन चुका है। प्रदेश के हर जिले में दो-दो फॉरेंसिक मोबाइल वैन उपलब्ध कराई गई हैं ताकि घटनास्थल से तत्काल वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए जा सकें।
साढ़े नौ वर्षों में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को मिलीं पारदर्शी नौकरियां
प्रदेश में हुए पुलिस व प्रशासनिक सुधारों का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान यूपी पुलिस में 2.30 लाख से अधिक कार्मिकों की भर्ती पूरी शुचिता के साथ की गई है, जिससे आज यूपी पुलिस दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस के रूप में स्थापित हुई है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में कुल 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी है और आगामी छह महीनों में 1 लाख और नौकरियां देने का लक्ष्य रखा गया है।
इन नवचयनित अधिकारियों को मिले नियुक्ति पत्र
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने डॉ. गरिमा सिंह, डॉ. कुमुदिनी बाला गौतम, पवन कुमार प्रजापति, डॉ. कपिल वर्मा, डॉ. प्रवीण कुमार तिवारी, रवि गुप्ता, शशांक शेखर तिवारी और डॉ. अतुल कुमार सहित कुल 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को मंच से नियुक्ति पत्र प्रदान किए।
इस अवसर पर राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण तथा अपर पुलिस महानिदेशक (तकनीकी सेवाएं) भगवान स्वरूप प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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