नई दिल्ली: बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। इस चुनाव में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर सीट पर शानदार और बड़ी जीत दर्ज की है। प्रशांत किशोर की इस अप्रत्याशित जीत के बाद से विपक्ष को एक नई राजनीतिक ताकत मिली है, जिसके बाद से विपक्षी दलों के नेता लगातार आक्रामक तेवर अपनाते हुए बीजेपी सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं।
इसी कड़ी में मीडिया से बातचीत करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और यूपी की बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि, इस बार बीजेपी ने बिल्कुल फेयर (निष्पक्ष) चुनाव करा लिया और वहां पुलिस-प्रशासन का वैसा दुरुपयोग नहीं किया, जिस तरह से उन्होंने उत्तर प्रदेश के कुंदरकी, मीरापुर और रामपुर के उपचुनावों के दौरान प्रशासनिक मशीनरी का खुलकर इस्तेमाल किया था।
उन्होंने कहा कि असल में बीजेपी इस चुनाव के जरिए यह चेक कर रही थी कि जनता के भीतर उनके खिलाफ आखिरकार कितनी नाराजगी है। साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब मुख्य आम चुनाव आएगा, तब ये लोग फिर से अपनी पूरी फोर्स मैदान में उतार देंगे।
’12 साल का मिला रिटर्न गिफ्ट, हनुमान जी और दान पात्र पर कसा तंज’
अखिलेश यादव ने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि बांकीपुर की करारी हार के बाद अब भारतीय जनता पार्टी और उनके कार्यकर्ताओं के पास कुछ भी बाकी नहीं बचा है। यह बीजेपी को पूरे 12 साल का मिला हुआ रिटर्न गिफ्ट है। उन्होंने तंज कसते हुए आगे कहा कि आप लोग बीजेपी से यह सवाल क्यों नहीं पूछते हैं कि आखिर हनुमान जी कहां नाच रहे थे? दान पात्र को लेकर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दान पात्र में ऊपर तो ताला लगा रहता है, लेकिन नीचे सुरंग होती है।
ई20 पेट्रोल को लेकर सरकार और ऑटो कंपनियों को घेरा
इसके अलावा अखिलेश यादव ने ई20 (E20) पेट्रोल के मुद्दे पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से नई गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े लुभावने विज्ञापन दिए जाते हैं, बिल्कुल उसी तरह से ई20 पेट्रोल का भी विज्ञापन देना चाहिए। सरकार और कंपनियों को जनता को यह बताना चाहिए कि इस पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज (एवरेज) बढ़ गया है और गाड़ियों का मेंटेनेंस कम हो गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर ऑटोमोबाइल कंपनियां ऐसा स्पष्टीकरण नहीं देती हैं, तो यह पूरी तरह साफ है कि वे सरकार के साथ मिलकर जनता की जेब काटकर सिर्फ भारी मुनाफा कमाने में लगी हुई हैं।
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