आगरा: ताजनगरी आगरा के रकाबगंज क्षेत्र से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक 80 वर्षीय महिला अधिवक्ता के बैंक खाते से साइबर अपराधियों ने शातिर तरीके से 22.88 लाख रुपये की बड़ी रकम उड़ा ली। हैरानी की बात यह है कि महिला ठगों के झांसे में नहीं आई थीं और उन्होंने संदिग्ध कॉल आते ही फोन काट दिया था, इसके बावजूद ठगों ने उनके बैंक खाते में जमा और एफडी (Fixed Deposit) के रूप में सुरक्षित रकम पर सेंध लगा दी। इस घटना के सामने आने के बाद से बुजुर्ग महिला और उनका परिवार हैरान है, वहीं साइबर क्राइम पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
ग्रीन गैस कर्मचारी बनकर आया था फोन
पीड़ित 80 वर्षीय महिला अधिवक्ता का खाता फेडरल बैंक में है। उन्होंने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि 29 सितंबर को उनके मोबाइल फोन पर एक अज्ञात कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को ‘ग्रीन गैस कंपनी’ का अधिकृत कर्मचारी बताया और कहा कि उनके गैस कनेक्शन से जुड़ी सब्सिडी की कुछ रकम उनके खाते में भेजी जानी है, जिसके लिए उन्हें महज 12 रुपये का ऑनलाइन भुगतान करना होगा।
चूंकि महिला ने करीब एक साल पहले ही अपना पीएनजी (PNG) कनेक्शन बंद करवा दिया था, इसलिए उन्हें फोन करने वाले की बात पर संदेह हुआ। उन्होंने ठग से आगे कोई भी बातचीत किए बिना तुरंत फोन काट दिया।
एफडी कराने के बाद भी सुरक्षित नहीं रही रकम
फोन कटने के बाद महिला ने अपनी बचत राशि को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए अगले दिन बैंक जाने का निर्णय लिया। बैंक पहुंचकर उन्होंने अपने बचत खाते में जमा करीब 22.88 लाख रुपये की एफडी (Fixed Deposit) करा दी, ताकि रकम सुरक्षित रहे और साइबर ठगों की पहुंच से दूर हो सके। उन्हें लगा कि अब उनके पैसे पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन उनकी यह सुरक्षा व्यवस्था महज दो दिनों में ही धरी की धरी रह गई।
गत 2 अक्टूबर को उनकी वह एफडी अचानक तोड़ दी गई और उसके बाद पूरी 22.88 लाख रुपये की रकम उनके खाते से अन्यत्र ट्रांसफर कर दी गई। बैंक से मोबाइल पर ट्रांजेक्शन के मैसेज आने के बाद महिला को खाते से इतनी बड़ी रकम निकलने की जानकारी हुई। होश उड़े परिवार ने तुरंत इसकी शिकायत साइबर क्राइम पुलिस से की।
पुलिस के सामने खड़े हो रहे कई बड़े सवाल
इस मामले ने साइबर पुलिस के सामने भी कई पेचीदा सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब महिला ने किसी ठग के साथ कोई ओटीपी (OTP) साझा नहीं किया, किसी लिंक पर क्लिक नहीं किया और खुद ही सतर्क होकर अपनी रकम एफडी में सुरक्षित करा दी थी, तब भी अपराधियों को इस बात की भनक कैसे लग गई और एफडी कैसे टूट गई?
साइबर पुलिस अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि कहीं इस प्रक्रिया में किसी स्तर पर अंदरूनी जानकारी या बैंक स्तर पर मिलीभगत तो नहीं थी। इसके साथ ही, महिला के मोबाइल फोन में किसी संदिग्ध एपीके (APK) फाइल या मालवेयर के जरिए रिमोट एक्सेस मिलने की संभावना को भी खंगाल जा रहा है। पुलिस टेक्निकल सर्विलांस और बैंक सर्वर लॉग की मदद से यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर इस रकम को किस डिजिटल रास्ते से निकाला गया है।
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