बंटवारे की प्रवृत्ति को बताया भारत माता के प्रति अपराध: मुख्यमंत्री बोले— क्षेत्र, जाति और भाषा के नाम पर समाज को तोड़ने वाली ताकतें देश की एकता के लिए खतरा

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आज का युवा ही भारत का सच्चा भाग्य विधाता बनने वाला है और हम किसी भी कीमत पर एक बिखरा, बंटा हुआ या जातीय खेमों में आपस में लड़ने वाला भारत नहीं देखना चाहते। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग इस तरह की सोच रखते हैं, वे अपने महान पूर्वजों के प्रति जरा भी श्रद्धा नहीं रखते हैं। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का निर्माण चाहते हैं।

मुख्यमंत्री रविवार को राजधानी लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ उन्होंने मां गायत्री, युगदृष्टा पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी के चित्रों के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान सीएम ने एक विशेष स्मारिका का विमोचन किया और भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्तर प्रदेश के शीर्ष-10 विद्यालयों को सम्मानित भी किया।

गायत्री परिवार ने यज्ञों की वेदी के जरिए सर्वसमाज को जोड़ा

सीएम ने कहा कि गायत्री परिवार के पास ड़ॉ. प्रणव पंड्या का मार्गदर्शन और डॉ. चिन्मय पंडया जैसे दूरदर्शी नायक हैं। इसलिए परिवार को अगले 100 वर्ष के लिए लक्ष्य तय करना है। गायत्री परिवार को तनावग्रस्त, संघर्ष में उलझी, अस्तित्व के जूझती मानवता के जीवन में नया उजाला लाना है। जब देश पराधीन था और व्यक्ति हताश-निराश था, लोगों को लगता था कि गुलामी नियति बन चुकी है। तब ब्रजभूमि आगरा में जन्म लेकर भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों व परंपरा के प्रति अगाध निष्ठा रखने वाले एक ऋषि का प्रादुर्भाव होता है। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने मथुरा में प्रारंभिक साधना को बढ़ाते हुए हरिद्वार में जिस गायत्री परिवार की स्थापना की, उसने यज्ञों के माध्यम से सर्वसमाज को एक वेदी पर बैठाकर सामाजिक एकता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

1923, 1925 और 1926: रास्ते अलग, पर लक्ष्य एक

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1923 में गोरखपुर में गीताप्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। तीनों के रास्ते, स्थान भले अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक है। तीनों संगठनों ने समाज की सुप्त चेतना को जागृत किया और उन्हें सनातन मूल्यों के साथ जोड़ा। भारत-भारतीयता का अहसास करके युवाओं को देश की आजादी के लिए कार्य करने को प्रेरित किया।

आजादी के आंदोलन से जुड़े आचार्य जी

सीएम ने कहा कि पं. श्रीराम शर्मा स्वाधीनता संग्राम सेनानी के रूप में आजादी के आंदोलन से जुड़े रहे। आजादी के आंदोलन से जुड़े अनेक ऋषियों ने इसमें सक्रिय योगदान दिया, लेकिन उन्हें लगा कि सफलता के लिए भौतिक ताकत के साथ आध्यात्मिक शक्ति की भी आवश्यकता है, तो साधना के माध्यम से उसे आगे बढ़ाया।

विचारों पर चलने वाले संगठन तय करते हैं लंबी दूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि विश्वामित्र द्वारा रचित सृष्टि का पहला मंत्र ‘गायत्री मंत्र’ परमपिता के तेज से जोड़ने का आह्वान करता है। जिसने भी इसकी शक्ति को अंगीकार किया, उसका कल्याण हो गया। पं. श्रीराम शर्मा जी इस संगठन को अपना नाम दे सकते थे, लेकिन उनका मानना था कि व्यक्ति से बड़ा परिवार होता है। इसलिए इसे गायत्री परिवार नाम दिया। व्यक्ति के नाम पर चलने वाला संगठन कुछ वर्षों के बाद धराशायी हो जाता है, लेकिन विचार के नाम पर चलने वाला संगठन लंबी दूरी तय करता है। 100 वर्ष की यह साधना इसका प्रमाण है। शब्द ब्रह्म है, विचार कभी नहीं मरते, इसी का प्रतीक है अखिल विश्व गायत्री परिवार।

संकट का मिलकर सामना करता था संयुक्त परिवार

सीएम ने कहा कि यज्ञों की वेदी पर ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से समाज को जोड़ने का काम पवित्र है। पहले संसाधन कम थे, लेकिन परिवार हमारी ताकत था। सभी भाई-उनके बच्चे संयुक्त परिवार की परंपरा में रहते थे। हर कोई मिलकर संकट का सामना करता था। आज परिवार सीमित हो गए। छत भले एक हो, लेकिन पांच परिवारों के मुख अलग-अलग दिशा में हैं। गायत्री परिवार जैसी संस्थाओं के कारण अवश्य स्थिति कुछ संतोषजनक है। दुनिया में बिखर रहे समाज और तबाह हो रहे परिवारों को बचाने के लिए मंत्रालय गठित करना पड़ा। एक मंत्री देख रहा है कि तनाव से बचने के लिए क्या करना है।

बिखराव रोकने का दायित्व उठाए गायत्री परिवार

मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार की सराहना करते हुए कहा कि इस परिवार की वजह से आज हर बच्चा गायत्री मंत्र सुना देता है। तुतलाती भाषा में बच्चों के मुख से गायत्री मंत्र सुनकर बहुत अच्छा लगता है। समाज में बिखराव को रोकने का दायित्व भी गायत्री परिवार को उठाना पड़ेगा। पं. श्रीराम शर्मा उन महापुरुषों में से हैं, जिन्होंने धर्म को विज्ञान से जोड़ा। धर्म और विज्ञान एक दूसरे के सहयोगी हैं। डॉ. चिन्मय पंड्या भी मॉडर्न मेडिसिन के चिकित्सक हैं, लेकिन अखिल विश्व गायत्री परिवार को आगे बढ़ा रहे हैं।

समाज की चेतना व युगनिर्माता हैं शिक्षक

सीएम ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युगनिर्माता बताया। कहा कि जब शिक्षक जागृत होता है और ईमानदारी से दायित्वों का निर्वहन करता है तो भारत को विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगती। जब दुनिया अज्ञानता के अंधकार में थी, तब भारत में श्रेष्ठ आचार्यों की परंपरा ने तक्षशिला व नालंदा जैसे श्रेष्ठ विश्वविद्यालय दिए। गुरुकुल व ऋषि परंपरा का नाम लेकर सीएम ने महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम, महर्षि सांदिपनी-श्रीकृष्ण, चाणक्य-चंद्रगुप्त का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा को फिर से जीवित करने की आवश्यकता है।

बांटने की प्रवृत्ति भारत माता के प्रति सबसे बड़ा अपराध

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुलामी के दौर में एक तबका समाज को विभाजित तो एक तबका समाज को जोड़ रहा था। बांटने वाले स्वाधीनता का विरोध करते थे और समाज को विभाजित करते थे। आज भी बांटने वाले तत्व क्षेत्र, जाति, भाषा के नाम पर समाज की एकता को छिन्न-भिन्न कर रहे हैं। यह भारत माता व पूर्वजों के प्रति अपराध है। भारत की स्वाधीनता को खतरे में डालने की शरारतपूर्ण चेष्टा है। जब राष्ट्र पर संकट आता है तो शिक्षकों की जिम्मेदारी बड़ी हो जाती है। उन्हें विभाजनकारी ताकतों को सफल नहीं होने देना है। यज्ञ की वेदी हमें ‘यह मेरा नहीं’ के भाव से जोड़ती है। प्रकृति, पेड़, जल स्रोत, गंगा मैया, सूर्य नारायण कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं करते।

पर्यावरण संरक्षण और नदियों के पुनर्जीवन पर विशेष फोकस

सीएम ने कहा कि यज्ञकुंड में समिधा डालने का भाव जोड़ना, आगे बढ़ाना और सामाजिक एकता के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूती प्रदान करना है। उन्होंने प्रधानमंत्री के “एक पेड़ मां के नाम” के भाव की चर्चा करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने 2017 से 2026 तक यूपी में 275 करोड़ पौधरोपण किए हैं। इस वर्ष भी हमने 35 करोड़ पौधे लगाए हैं। उनके संरक्षण व सुरक्षा के उपाय भी किए गए हैं। देहरादून फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ हमें थर्ड पार्टी के रूप में इसकी रिपोर्ट देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार जवाबदेही तय होती है। इसका पीछे हमारा ध्येय है कि भावी पीढ़ी को सुखद व सुंदर माहौल दे सकें।

शरीर में धमनियों जैसी नदियों की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हर नदी प्रदूषित हो गई है। स्वार्थ के लिए नदी संस्कृति को नष्ट कर दिया गया। जीवनदायिनी नदियां नहीं रहेंगी तो जीवन सृष्टि के सामने संकट खड़ा होगा। नदियों की भूमिका वैसे ही है, जैसे शरीर में धमनियों की। हमें नदियों को बचाकर उन्हें अविरल-निर्मल करना होगा। एक नदी दशकों पहले सूख गई थी। हमने सेटेलाइट मैपिंग से उसके इमेज निकाले, उसकी खुदाई प्रारंभ कराई। कार्य संपन्न होने के बाद बरसात में वहां जल धारा फूट पड़ी। इससे पूर्वजों की तपस्या साकार हुई। जिन लोगों ने उस नदी का जल ग्रहण किया होगा, नदी के पुनर्जीवित होने पर उन्हें आशीर्वाद प्राप्त होगा।

कर्तव्य को दें अधिकारों से अधिक महत्व

सीएम ने योग दिवस को मान्यता दिलाने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि 21 जून को 190 से अधिक देश योग से जुडकर ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं। आजादी के शताब्दी महोत्सव के हमारे संकल्प स्पष्ट हैं- गुलामी की मानसिकता को त्यागना, विरासत पर गौरव की अनुभूति, सामाजिक समता के लिए काम करना, विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाना, नागरिक कर्तव्यों का अहसास करना और अधिकार से अधिक कर्तव्य को महत्व देना। हर व्यक्ति कर्तव्य के प्रति ईमानदार हो जाए तो भारत को कोई आंख नहीं दिखा सकता, बल्कि भारत दुनिया को नेतृत्व देगा। 2047 हम सभी को अभिभूत करेगा।

नई पीढ़ी में स्थापित हों भारतीय मूल्य : डॉ. चिन्मय पंड्या

​इस प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. चिन्मय पंड्या ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में काम, क्रोध, लोभ, स्वार्थ और संकीर्णता मनुष्य के भीतर की सबसे बड़ी चुनौतियां बन चुकी हैं। इनसे पार पाने के लिए समाज में धर्म, न्याय, नीति और सदाचार के मूल्यों को फिर से मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि ‘भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा’ का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के भीतर भारतीय संस्कृति के मूल संस्कारों और बीजों को स्थापित करना है।

Dr. Bhanu Pratap Singh