चंडीगढ़: अखिल भारतीय महापौर परिषद की 118वीं बैठक का आयोजन चंडीगढ़ के होटल माउंट व्यू में किया गया। इस दो दिवसीय बैठक के खुले अधिवेशन में देश भर से जुटे महापौरों और जनप्रतिनिधियों ने नगरीय विकास, जनसुविधाओं, सुशासन और नगर निकायों के सशक्तीकरण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया। इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्यसभा सांसद एवं अखिल भारतीय महापौर परिषद के पूर्व अध्यक्ष नवीन जैन ने विशेष रूप से शिरकत की और शहरी विकास की नीतियों में महापौरों के अनुभवों को अत्यधिक महत्वपूर्ण बताया।
चंडीगढ़ के होटल माउंट व्यू में आयोजित इस अधिवेशन का विधिवत शुभारंभ पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया। इस दौरान राज्यसभा सांसद नवीन जैन और महापौर परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं करनाल की महापौर रेणु बाला गुप्ता ने राज्यपाल के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। अधिवेशन में देश भर से आए महापौरों और जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने शहरों के विकास अनुभवों, बेहतरीन सफल प्रयोगों और नगरीय प्रशासन से जुड़े विषयों पर खुलकर विचारों का आदान-प्रदान किया।
’नगर निकायों को मजबूत किए बिना समग्र विकास संभव नहीं’
अधिवेशन को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने जोर देकर कहा कि स्थानीय शहरी निकायों को मजबूत किए बिना देश के शहरों के समग्र विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि महापौर और नगर निकाय सीधे तौर पर आम नागरिकों से जुड़े होते हैं, और जनता को सड़क, साफ-सफाई, जल निकासी, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका सबसे अहम होती है। इसके लिए आवश्यक है कि नगर निकायों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन, प्रशासनिक अधिकार और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
नवीन जैन ने देश भर के महापौरों के व्यावहारिक अनुभवों और सुझावों को शहरी विकास की भावी नीतियों के लिए बेहद उपयोगी बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि अलग-अलग शहरों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप किए जा रहे सफल प्रयोगों को एक-दूसरे के साथ साझा किया जाना चाहिए, ताकि अन्य नगर निकाय भी उन बेहतर कार्यप्रणालियों से सीख लेकर अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति दे सकें।
महापौरों के कार्यकाल और अधिकारों में एकरूपता की मांग
बैठक के दौरान नवीन जैन ने देश भर में महापौरों के कार्यकाल, अधिकारों और जिम्मेदारियों में एकरूपता लाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पैरवी करते हुए कहा कि पूरे देश में महापौरों के लिए एक समान पांच वर्ष का कार्यकाल होना चाहिए तथा उनके अधिकार और जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से निर्धारित की जानी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने 74वें संविधान संशोधन के प्रावधानों को पूरी तरह और प्रभावी रूप से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि शहरी स्थानीय निकायों को वित्तीय व प्रशासनिक रूप से अधिक सशक्त बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि मजबूत नगर निकाय ही मजबूत शहरों की मजबूत आधारशिला हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए यह अनिवार्य है कि नगर निकायों को और अधिक सक्षम बनाया जाए, महापौरों की शक्तियों में वृद्धि हो और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।
ये गणमान्य लोग रहे मौजूद
अधिवेशन के दौरान अखिल भारतीय महापौर परिषद की अध्यक्ष एवं करनाल की महापौर रेणु बाला गुप्ता, चंडीगढ़ के महापौर सौरभ जोशी, परिषद के महासचिव आशुतोष वार्ष्णेय, पूर्व सांसद एवं अभिनेत्री किरण खेर सहित देश के विभिन्न नगर निगमों के महापौर और अन्य जनप्रतिनिधि भारी संख्या में उपस्थित रहे। इस बैठक का मुख्य संदेश यही रहा कि शहरों की बदलती और बढ़ती जरूरतों के अनुरूप नगर निकायों को अधिक सक्षम, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाया जाए।
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