आगरा से पकड़ा गया 3 करोड़ की कोडीन सिरप तस्करी का कथित सरगना: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर पकड़ी गई थी 250 पेटी, फर्जी बिलों से चल रहा था खेल

Crime

​आगरा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर पकड़ी गई करीब तीन करोड़ रुपये की 250 पेटी ONEREX कोडीन सिरप की अवैध खेप के मामले में उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इसके कथित सरगना प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन को आगरा से गिरफ्तार कर लिया है। करीब 30 हजार शीशियों की इस बड़ी खेप के खुलासे के बाद यह बात सामने आई है कि तस्कर फर्जी जीएसटी बिलों, बोगस मेडिकल एजेंसियों और उत्पादों के रैपर बदलकर इस प्रतिबंधित सिरप को बाजार में खपाने का एक बड़ा काला कारोबार चला रहे थे। प्रियांशु की गिरफ्तारी के बाद अब एसटीएफ इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य सप्लायर, फाइनेंसर और अन्य संलिप्त सदस्यों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ दबिश दे रही है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर पकड़ी गई थी भारी खेप

कोडीन सिरप की तस्करी के इस संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ तब हुआ जब एसटीएफ ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर एक वाहन की चेकिंग के दौरान 250 पेटी ONEREX कफ सिरप बरामद किया। इतनी भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवा मिलने के बाद अधिकारियों ने इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगालनी शुरू कीं। शुरुआती जांच और जब्त दस्तावेजों से यह साफ हो गया कि करीब 30 हजार शीशियों की यह खेप सामान्य दवा बिक्री के नाम पर आगे भेजी जा रही थी, जिसकी अनुमानित कीमत बाजार में लगभग 3 करोड़ रुपये आंकी गई है।

​रैपर बदलकर किराना स्टोरों तक पहुंचाई जा रही थी खेप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, तस्करी के इस नेटवर्क का दायरा काफी फैला हुआ था। आरोप है कि कोडीनयुक्त सिरप को अलग-अलग तरीकों से बाजार में उतारने के लिए इसके मूल रैपर बदलकर इसे सामान्य उत्पाद की तरह दिखाने का प्रयास किया जाता था। इसके बाद इसकी सप्लाई केवल मेडिकल स्टोरों तक ही नहीं, बल्कि किराना और जनरल स्टोरों तक भी किए जाने की चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं।

यही वजह है कि एसटीएफ अब केवल इस पकड़ी गई खेप तक सीमित न रहकर इसके पूरे सप्लाई चेन की गहराई से छानबीन कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि यह सिरप किस फैक्ट्री या डिपो से उठाया जाता था, किसके नाम पर फर्जी बिल तैयार होते थे और इसे किन-किन जिलों या राज्यों में भेजा जाता था।

प्रियांशु की गिरफ्तारी से खुलेंगे कई अहम राज

एसटीएफ द्वारा प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन की गिरफ्तारी को इस मामले में एक बहुत बड़ी और निर्णायक कड़ी माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि उससे कड़ी पूछताछ के बाद इस अवैध सिंडिकेट से जुड़े कई अन्य नाम सामने आ सकते हैं। फर्जी जीएसटी बिल बनाने वाले मास्टरमाइंड, बोगस मेडिकल एजेंसियों का संचालन करने वाले लोग और माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने वाले ट्रांसपोर्टर भी अब जांच के सीधे दायरे में आ चुके हैं।

नशे के अवैध कारोबार पर सुरक्षा एजेंसियों की यह कार्रवाई

एक बार फिर दवा व्यापार की आड़ में चल रहे काले धंधों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। एसटीएफ की अगली कार्रवाई अब इस बात पर केंद्रित है कि इस तीन करोड़ रुपये के खेल में परदे के पीछे बैठे असली खिलाड़ी कौन-कौन हैं और इस अवैध नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हुई हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh