आगरा में दशहरा शोभायात्रा से पहले घमासान: समिति गठन को लेकर भाजपा और सपा समर्थित गुट आमने-सामने, डीसीपी कार्यालय पहुंचा विवाद

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आगरा: ताजनगरी में विजयादशमी के पावन पर्व पर लोहामंडी से सेंट जोंस चौराहे तक निकाले जाने वाली वर्षों पुरानी ऐतिहासिक दशहरा शोभायात्रा इस बार आयोजन से काफी पहले ही गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। शोभायात्रा की आयोजन समिति के गठन और चयन प्रक्रिया को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े क्षेत्रीय पार्षदों और स्थानीय नागरिकों ने तीखे सवाल खड़े किए हैं।

आरोप लगाया जा रहा है कि गत चार अक्टूबर को आयोजित बैठक में सभी पक्षों की सहमति से लिए गए सर्वसम्मत निर्णय को ताक पर रखकर कुछ लोगों ने अपनी मनमर्जी से एक नई समिति का गठन कर लिया है। इस पूरे घटनाक्रम से नाराज पार्षदों और क्षेत्रीय निवासियों ने पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को लिखित शिकायती पत्र सौंपकर इस मामले में त्वरित प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस विवाद के पीछे भाजपा और समाजवादी पार्टी से जुड़े गुटों के बीच वर्चस्व की खींचतान चल रही है। इस प्रकार के आंतरिक टकराव और विरोध के कारण शहर की इस प्रतिष्ठित दशहरा शोभायात्रा की तैयारियों और भव्यता पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

शिकायत दर्ज कराने वाले प्रमुख पार्षदों में हेमंत प्रजापति, शरद चौहान, विक्रांत कुशवाह, राजेश कुमार प्रजापति और अमित पटेल के साथ-साथ कई अन्य गणमान्य क्षेत्रीय नागरिक शामिल हैं। उनका कहना है कि यह पारंपरिक शोभायात्रा दशकों से शहर की धार्मिक आस्था, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रही है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भाग लेते हैं। ऐसे में यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं किया गया, तो आयोजन की व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।

11 सितंबर की बैठक में तय हुई थी चुनाव की रूपरेखा

सामने आए विवरण के मुताबिक, इस संपूर्ण विवाद की जड़ें 11 सितंबर को हुई एक प्रारंभिक बैठक से जुड़ी हैं। यह बैठक स्थानीय पार्षद शरद चौहान के आवास पर बुलाई गई थी, जिसमें रामदास कटारा, पार्षद हेमंत प्रजापति, विक्रांत कुशवाह, विनय अग्रवाल, हिमांशु शिवहरे, विकास गुप्ता, अमित बंसल और अमित सिंह पटेल सहित क्षेत्र के तमाम प्रबुद्ध लोग उपस्थित थे। उस बैठक में यह तथ्य सामने रखा गया था कि दशहरा शोभायात्रा की वर्तमान आयोजन समिति कानूनी रूप से पंजीकृत नहीं है, इसलिए हर वर्ष की परंपरा के अनुसार चुनाव अधिकारियों और वरिष्ठ संरक्षक मंडल की देखरेख में नई समिति का गठन किया जाता है। इसी स्थापित व्यवस्था के तहत पिछले वर्ष के आय-व्यय (बजट) का आधिकारिक हिसाब प्रस्तुत करने और आगामी नई समिति के चयन के लिए चार अक्टूबर को मंदिर परिसर में एक खुली बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया था।

​आय-व्यय का हिसाब मांगने पर बढ़ा गतिरोध

​शिकायतकर्ताओं के अनुसार, निर्धारित कार्यक्रम के तहत चार अक्टूबर को मंदिर परिसर में हुई बैठक में चुनाव अधिकारी बसंत श्रीवास्तव, रामदास कटारा और मटरू सिंह मुख्य रूप से मौजूद थे। बैठक के दौरान उपस्थित सदस्यों और पार्षदों ने पिछले वर्ष दशहरा शोभायात्रा के सफल आयोजन पर कुल हुए खर्च और प्राप्त हुई कुल धनराशि का स्पष्ट ब्योरा मांगा। आरोप है कि बार-बार मांग किए जाने के बावजूद समिति की ओर से कोई संतोषजनक आय-व्यय का हिसाब प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके चलते बैठक में गर्मा-गर्मी और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।

​मामला बढ़ता देख चुनाव अधिकारियों ने वहां मौजूद तमाम सदस्यों से उनकी राय जानी। शिकायत में दावा किया गया है कि उस वक्त सभी सदस्यों की सर्वसम्मत सहमति से यह निर्णय लिया गया था कि इस वर्ष किसी भी एक व्यक्ति को अध्यक्ष या अन्य किसी पद पर औपचारिक रूप से घोषित नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, सभी कार्यकर्ताओं की सामूहिक देखरेख, आपसी सहयोग और सहभागिता से ही इस वर्ष दशहरा शोभायात्रा का सफल संचालन किया जाएगा।

शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि पूर्व में भी जब कभी समिति को लेकर इस तरह के गतिरोध उत्पन्न हुए, तो सामूहिक व्यवस्था के फार्मूले से ही शोभायात्रा का आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न कराया गया था। यही वजह थी कि चार अक्टूबर का यह निर्णय सभी पक्षों के बीच आपसी सामंजस्य बिठाकर विवाद को टालने का एक सार्थक प्रयास था।

​14 अक्टूबर को नई समिति के गठन की खबर से मचा हड़कंप

शिकायत में आगे यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि चार अक्टूबर को लिए गए सर्वसम्मत फैसले के बावजूद, परदे के पीछे 13 अक्टूबर तक मंदिर परिसर में गुप्त बैठकों का दौर जारी रहा। इन बैठकों की जानकारी चुनिंदा लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से दी जा रही थी, जबकि सामान्य सदस्यों के बीच सामूहिक रूप से शोभायात्रा निकालने की ही चर्चा चल रही थी। इसी बीच, 14 अक्टूबर को अचानक समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से यह जानकारी सार्वजनिक हुई कि विनय अग्रवाल ने स्वयं को अध्यक्ष घोषित करते हुए एक नई आयोजन समिति का गठन कर लिया है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के सामने आते ही समिति से जुड़े पुराने कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय निवासियों में भारी नाराजगी फैल गई। शिकायतकर्ताओं ने इस नए गठन को चार अक्टूबर के कथित सर्वसम्मत और सामूहिक निर्णय के पूरी तरह विपरीत करार दिया है। उनका आरोप है कि सामूहिक व्यवस्था से आयोजन कराने पर आम सहमति बनने के बावजूद एक अलग और समानांतर समिति खड़ी करके पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी गई है।

​राजनीतिक स्वार्थ और व्यक्तिगत हितों के आरोप

शिकायत पत्र में विनय अग्रवाल पर स्पष्ट रूप से राजनीतिक उद्देश्यों के तहत समिति गठित करने का आरोप मढ़ा गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि विनय अग्रवाल पूर्व में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं और उनके इस प्रकार के कदम के पीछे उनके कुछ निजी तथा राजनीतिक हित जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ताओं के अपने स्तर से लगाए गए हैं और इनकी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि चुनाव अधिकारियों ने भी आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप पर इस तरह से रातोंरात नई समिति के गठन पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। पार्षदों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब विधिवत बैठक में सभी की रजामंदी से इस वर्ष किसी भी पदाधिकारी का चयन न करने पर मुहर लग चुकी थी, तो उसके बाद इस प्रकार की नई समिति बनाने की प्रक्रिया अपने आप में कई बड़े सवाल खड़े करती है।

डीसीपी से निष्पक्ष जांच और पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग

इस पूरे घटनाक्रम से आहत भाजपा से जुड़े क्षेत्रीय पार्षदों और अन्य शिकायतकर्ताओं ने पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को औपचारिक शिकायती पत्र सौंपकर पूरे प्रकरण की गहराई से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित बैठकों के रजिस्टर, चार अक्टूबर की बैठक में दर्ज निर्णयों और पिछले आयोजनों के वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड की तकनीकी व प्रशासनिक जांच कराई जाए।

​शिकायतकर्ताओं की प्रमुख और अंतिम मांग यह है कि चार अक्टूबर को लिए गए सर्वसम्मत निर्णय को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए और इस वर्ष की दशहरा शोभायात्रा का पूरा आयोजन किसी व्यक्ति विशेष के अधीन न होकर पूरी तरह सामूहिक व्यवस्था के तहत ही संपन्न कराया जाए। उनका मानना है कि धार्मिक आयोजनों में पूर्ण पारदर्शिता होना अनिवार्य है, ताकि किसी भी पक्ष या कार्यकर्ता को मनमानी या उपेक्षा का शिकार होने की शिकायत का मौका न मिले।

मिश्रित आबादी और संवेदनशील मार्ग को लेकर कानून-व्यवस्था की चिंता

शिकायतकर्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि लोहामंडी से लेकर सेंट जोंस चौराहे तक निकाली जाने वाली यह भव्य दशहरा शोभायात्रा एक अत्यंत संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरती है, जिसमें हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु और आम नागरिक शामिल होते हैं। ऐसे में, यदि आयोजन समिति के स्तर पर ही इस प्रकार का आंतरिक विवाद और खींचतान चलती रही, तो यह न केवल धार्मिक आयोजन की तैयारियों को प्रभावित करेगा, बल्कि क्षेत्र की शांति और कानून-व्यवस्था के लिहाज से भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

​पार्षदों ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से यह पुरजोर अपील की है कि वे समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप करें और दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित कर इस विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान कराएं, ताकि आगामी विजयादशमी का यह पवित्र त्योहार पूरी तरह आपसी भाईचारे, शांतिपूर्ण माहौल और पारंपरिक गरिमा के साथ संपन्न हो सके। फिलहाल, इस शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर होने वाली आगामी कार्रवाई और जांच के रुख पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh