आगरा के ​श्री मनःकामेश्वर मठ मंदिर में श्रीनाथजी का 108 कलशों से हुआ दिव्य अभिषेक, महादेव के धाम में गूंजे हवेली संगीत के पुष्टिमार्गीय पद

RELIGION/ CULTURE

बधाई आज नंद घर बाजत, प्रकटे श्रीकृष्ण कृपाल…

दूध, दही, घृत, पवित्र नदियों के जल और सुगंधित द्रव्यों से हुआ श्रीनाथजी का अभिषेक, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में उमड़ा भक्तिभाव, वर्ष में एक बार होने वाले श्रीनाथजी के लंगोट दर्शन कर भक्त हुए निहाल

आगरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर रावतपाड़ा स्थित श्री मनःकामेश्वर मठ मंदिर परिसर के श्रीनाथजी मंदिर में भक्तिभाव और वैदिक परंपराओं के मध्य भव्य 108 कलश अभिषेक एवं हवेली संगीत-बधाई गायन का आयोजन किया गया। महादेव के पावन धाम में श्रीनाथजी के दिव्य अभिषेक का यह अलौकिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति लेकर आया।

अभिषेक के लिए दूध, दही, घृत सहित विभिन्न पवित्र नदियों के गंगा-यमुना के पावन जल, तीर्थों के पवित्र जल, रामसेतु एवं रामेश्वरम के जल तथा विभिन्न औषधीय और सुगंधित द्रव्यों का प्रयोग किया गया। इत्र और चंदन की दिव्य सुगंध से मंदिर परिसर महक उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए। वर्ष में एक बार होने वाले श्री नाथ जी के लंगोट दर्शन कर भक्त निहाल हो गए।

श्रीमहंत योगेश पुरी ने इस अवसर पर कहा कि महादेव से बड़ा कोई वैष्णव नहीं है और श्रीकृष्ण से बड़ा कोई महादेव का भक्त नहीं है। उन्होंने कहा कि शिव और विष्णु की आराधना में कोई भेद नहीं, बल्कि दोनों एक-दूसरे की भक्ति और प्रेम के दिव्य स्वरूप हैं। महादेव के पावन धाम में श्रीनाथजी का 108 कलशों से अभिषेक एक ऐसा अलौकिक और अनूठा आध्यात्मिक अनुभव है, जिसकी अनुभूति को हर साधक अपने श्रद्धा और भाव के अनुसार आत्मसात करता है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर हवेली संगीत के सुप्रसिद्ध गायक डॉ. सदानंद भट्ट ने तानपुरा और पखावज की मधुर संगत के साथ पुष्टिमार्गीय पदों एवं बधाई गायन की मनोहारी प्रस्तुति दी। उनके स्वर जैसे ही मंदिर परिसर में गूंजे, वातावरण ब्रज की भक्ति और आनंद रस से भर उठा।

श्रीनाथजी के प्राकट्य और नंदोत्सव की भावनाओं को स्वर देते हुए पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुरूप पदों और बधाइयों का गायन किया गया। “आजु नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…”
“नंद के आनंद भयो, जय हो नंदलाल की, हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की…” जैसे पदों में हवेली संगीत की परंपरागत गायकी में श्रीकृष्ण जन्म की मंगल बधाइयों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को ब्रजभूमि के उस दिव्य क्षण का भावात्मक अनुभव कराया, जब नंद भवन में लाला के प्राकट्य पर समूचा ब्रज आनंद से झूम उठा था।

मठ-मंदिर प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के क्रम में शनिवार को श्रीकृष्ण नंदोत्सव एवं सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। सायंकाल 7 बजे से बच्चों द्वारा सांस्कृतिक एवं नृत्य प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिनमें श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, राधा-कृष्ण के प्रेम और ब्रज संस्कृति की मनोहारी झलक दिखाई देगी।

उन्होंने बताया कि नंदोत्सव के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशियां परंपरागत उल्लास के साथ मनाई जाएंगी। इस दौरान श्रद्धालुओं और बच्चों के बीच खिलौनों एवं प्रसाद का वितरण भी किया जाएगा।

Dr. Bhanu Pratap Singh