आगरा के गुरुद्वारा गुरु का ताल में निहंग सिखों के शौर्य और युद्धकला का अद्भुत प्रदर्शन, घुड़सवारी और गतका के करतब देख दंग रह गई संगत

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​आगरा। ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु का ताल परिसर में रविवार को निहंग सिखों की अद्वितीय वीरता, शौर्य और पारंपरिक सिख युद्धकला का बेहद रोमांचक प्रदर्शन देखने को मिला। बाबा बकाला साहिब (पंजाब) के प्रतिष्ठित ‘श्री मिसल शहीदा तरना दल’ के निहंग सिंहों ने कभी दो तो कभी एक साथ चार-चार घोड़ों पर सवार होकर जिस अप्रत्याशित रफ्तार और संतुलन के साथ घुड़सवारी के हैरतअंगेज करतब पेश किए, उन्हें देखकर वहां मौजूद हर कोई आश्चर्यचकित रह गया। धूल के गुबार उड़ाते और हवा से बातें करते घोड़ों पर निहंग सिखों के साहसिक प्रदर्शन ने पूरे परिसर को रोमांच और जयकारों से भर दिया। इस दौरान पारंपरिक गतका और शस्त्र विद्या का भी भव्य प्रदर्शन किया गया।

​दशहरे पर हजूर साहिब से लौटते समय आगरा में दो दिवसीय पड़ाव

​गौरतलब है कि श्री मिसल शहीदा तरना दल (श्री बाबा बकाला साहिब, पंजाब) सिखों का एक अत्यंत प्राचीन, सुसंगठित और बड़ा धार्मिक व निहंग संगठन है, जिसमें बड़ी संख्या में समर्पित निहंग सिंह शामिल हैं। यह दल देशभर में आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक समारोहों में नियमित रूप से सहभागिता करता है। दल के साथ लगभग 100 सुप्रशिक्षित घोड़े भी विचरण करते हैं। इस वर्ष भी यह दल महाराष्ट्र स्थित श्री हजूर साहिब में आयोजित विशेष दशहरा महोत्सव में सम्मिलित होकर वापस पंजाब लौट रहा था। दशकों पुरानी चली आ रही परंपरा के अनुसार निहंग सिंहों ने आगरा के गुरुद्वारा गुरु का ताल में दो दिनों का विश्राम व पड़ाव किया।

​संगत के विशेष आग्रह पर सजा अखाड़ा

बाबा बकाला साहिब के मुखी सिंह साहिब जत्थेदार बाबा जोगा सिंह के कुशल नेतृत्व में पूरा दल गुरुद्वारा गुरु का ताल पहुंचा। यहाँ आगरा की साध-संगत के विशेष आग्रह और भावपूर्ण अनुरोध पर निहंग सिंहों ने पारंपरिक अखाड़ा सजाकर घुड़सवारी, निशानेबाजी और गतका सहित विभिन्न प्राचीन शस्त्रों के अदम्य संचालन का प्रदर्शन किया।

​गुरुद्वारा गुरु का ताल के मुख्य सेवादार संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि बाबा बकाला साहिब के इस निहंग दल का गुरुद्वारा गुरु का ताल से दशकों पुराना आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। संत बाबा साधू सिंह मौनी के पावन काल से ही यह दल प्रतिवर्ष यहाँ आता रहा है। इस वर्ष भी दल के सदस्यों ने गुरुद्वारे में रुककर श्रद्धालुओं को अपनी समृद्ध समृद्ध पारंपरिक युद्धकला और कलाबाज़ियों से रूबरू कराया।

​प्रमुख जत्थेदारों का सिरोपा भेंट कर सम्मान

समारोह के समापन अवसर पर तरना दल के मुखी बाबा जोगा सिंह सहित दल के प्रमुख जत्थेदारों और निहंग सिखों का संत बाबा प्रीतम सिंह, बाबा अमरीक सिंह, जत्थेदार बाबा अमर सिंह, महंत हरपाल सिंह, ग्रंथी हरबंस सिंह और ज्ञानी केवल सिंह ने गुरु घर का सिरोपा (सम्मान वस्त्र) भेंट कर भावुक स्वागत व नागरिक सम्मान किया।

​इस अवसर पर बाबा बकाला साहिब के मुखी जत्थेदार बाबा जोगा सिंह, संत बाबा प्रीतम सिंह और बाबा अमरीक सिंह सहित भारी संख्या में संत, सेवादार और श्रद्धालु मौजूद रहे। निहंग सिखों के उत्कृष्ट शौर्य, कठोर अनुशासन और पारंपरिक युद्ध शैली के इस प्रदर्शन ने पूरी संगत को गौरवमयी सिख इतिहास और महान विरासत का प्रत्यक्ष अनुभव कराया।

Dr. Bhanu Pratap Singh