आगरा। शहर के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध गुरुद्वारा गुरु का ताल में पिछले दो वर्षों से निरंतर चल रही कार सेवा के बाद मुख्य प्रवेश द्वार ‘दर्शन ड्योढ़ी’ का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हो गया है। रविवार को रिमझिम वर्षा के बीच कीर्तन करते हुए निकाली गई परिक्रमा दर्शन ड्योढ़ी पर पहुंची, जहां विधिवत कीर्तन और अरदास के बाद इसे पूरी संगत को समर्पित किया गया। इसके उपरांत संगत ने नए दर्शन ड्योढ़ी से गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश कर इसका औपचारिक उद्घाटन किया। गुरुद्वारा गुरु का ताल में अब देश-विदेश से लगातार बढ़ रही संगत की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लंगर हॉल के विस्तार और अत्याधुनिक रसोई के निर्माण की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मुख्य प्रवेश द्वार यानी दर्शन ड्योढ़ी के निर्माण की यह सेवा पिछले दो वर्षों से अनवरत चल रही थी। निर्माण कार्य पूरा होने के पश्चात गत रविवार को अलसुबह कीर्तन के साथ प्रभात फेरी निकाली गई। गुरुद्वारे के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह की अगुवाई और पावन निशान साहिब के सानिध्य में यह कीर्तन परिक्रमा दर्शन ड्योढ़ी तक पहुंची। यहां सामूहिक कीर्तन के बाद अरदास की गई, जिसके बाद संगत ने दर्शन ड्योढ़ी से होते हुए गुरुद्वारा गुरु का ताल के भीतर प्रवेश किया। इसी के साथ दर्शन ड्योढ़ी का औपचारिक उद्घाटन संपन्न हुआ और इसे समर्पित कर दिया गया।
ऐतिहासिक गुरुद्वारे की भव्यता में जुड़ेगा नया अध्याय
गुरुद्वारे के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह ने इस अवसर पर जानकारी देते हुए बताया कि गुरुद्वारे के इस मुख्य प्रवेश द्वार को एक बेहद विशेष और भव्य स्वरूप प्रदान किया गया है। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के इस ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल की भव्यता में यह विशाल प्रवेश द्वार एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेगा। यहां आने वाली देश-दुनिया की संगत इस विशाल दर्शन ड्योढ़ी से प्रवेश करते हुए इस पावन परिसर की गरिमा और गौरव का और अधिक गहन अनुभव कर सकेगी।
विशाल प्रवेश द्वार पर नहीं लगाया गया कोई दरवाजा
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह ने एक विशेष जानकारी साझा करते हुए बताया कि दर्शन ड्योढ़ी के साथ-साथ गुरुद्वारा परिसर के भीतर मुख्य सीढ़ियों पर बने प्रवेश द्वार पर भी जानबूझकर कोई दरवाजा नहीं लगाया गया है। मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह का स्पष्ट मानना है कि गुरुद्वारे के द्वार किसी खास वर्ग के लिए नहीं, बल्कि हर धर्म, जाति और वर्ग के इंसानों के लिए हर समय खुले हैं। इसी महान भावना को सर्वोपरि रखते हुए किसी भी मुख्य प्रवेश द्वार पर कपाट या दरवाजा नहीं बनाया गया है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में भी गुरुद्वारा साहिब को एक दिन के लिए भी बंद नहीं किया गया था, और उस संकट काल में भी जरूरतमंदों तथा अन्य शहरों से पैदल गुजर रहे राहगीरों के लिए यहां अनवरत लंगर सेवा जारी रही थी।
दोगुनी होगी लंगर हॉल की क्षमता, बनेगी अत्याधुनिक रसोई
गुरुद्वारा गुरु का ताल में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ बाहरी क्षेत्रों से आने वाली संगत की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए अब लंगर हॉल के बड़े पैमाने पर विस्तार की योजना तैयार की गई है। संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में अन्य प्रदेशों से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। इसके अलावा, विभिन्न बड़े गुरु पर्वों के अवसरों पर स्थानीय स्तर पर भी बहुत बड़ी संख्या में संगत यहां पहुंचती है, जिसके कारण कई बार लंगर के दौरान संगत को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
इसी समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए लंगर हॉल की क्षमता को आगामी समय में दोगुना करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही एक अत्याधुनिक रसोई का निर्माण भी कराया जाएगा, जिसमें नवीनतम तकनीक पर आधारित मशीनों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। पारंपरिक गैस चूल्हों के स्थान पर भाप (स्टीम) के माध्यम से लंगर तैयार करने की आधुनिक तकनीक अपनाने की भी योजना है। इन दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर बहुत जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
रिमझिम वर्षा के बीच निकली आनंदमयी कीर्तन परिक्रमा
दर्शन ड्योढ़ी के उद्घाटन और लोकार्पण समारोह के दौरान रिमझिम बारिश के बीच संगत ने बेहद उत्साह के साथ कीर्तन करते हुए परिक्रमा निकाली। पावन निशान साहिब के साए में निकली इस प्रभात फेरी में तमाम श्रद्धालु पूरी तरह भक्तिभाव में लीन होकर शामिल हुए। दर्शन ड्योढ़ी पर पहुंचने पर जब सुखद माहौल में कीर्तन और अरदास संपन्न हुई, तो संगत ने नवनिर्मित प्रवेश द्वार से गुरुद्वारा गुरु का ताल में प्रवेश किया।
समारोह में इन विशिष्ट जनों की रही मौजूदगी
दर्शन ड्योढ़ी के उद्घाटन और अरदास के इस पावन अवसर पर गुरुद्वारा गुरु का ताल के जत्थेदार राजेंद्र सिंह इंदौरिया, बाबा अमरीक सिंह, ग्रंथि हरबंस सिंह, अजायब सिंह टीटू, महंत हरपाल सिंह, जोगा सिंह, ज्ञानी केवल सिंह, श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान कवलजीत सिंह, गुरुद्वारा माईथान के हेड ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह, सरदार दलजीत सिंह सेतिया, श्याम भोजवानी, वीर महेंद्र पाल सिंह, अवनीत कौर, गुरमीत सिंह सेठी और लकी सेतिया सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
- आगरा के ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु का ताल में दर्शन ड्योढ़ी का भव्य उद्घाटन: रिमझिम वर्षा के बीच संगत को समर्पित हुआ नया प्रवेश द्वार, अब दोगुनी होगी लंगर हॉल की क्षमता - September 6, 2026
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