लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस के पावन अवसर पर रिजर्व पुलिस लाइंस में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान कर्तव्यपालन के दौरान अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले राज्य के छह वीर पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस वर्ष गौतमबुद्धनगर जिले के दो साहसी अग्निशमन कर्मियों और जालौन जिले के चार पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई है। इस अत्यंत संवेदनशील और गरिमामयी अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहीद जवानों के परिजनों को सम्मानित भी किया और उनके साथ गहरी संवेदना प्रकट की।
गौतमबुद्धनगर और जालौन के शहीदों का अदम्य साहस
विगत 4 अगस्त 2026 को ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक-3 क्षेत्र स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक कंपनी में भीषण आग लग गई थी। सूचना मिलते ही फायर सर्विस चालक तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित यादव अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुँचे। आग बुझाने के दौरान अचानक कंपनी की एक भारी दीवार अग्निशमन वाहन पर ढह गई, जिससे मलबे में दबकर दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।
जालौन (सड़क हादसा): 5 मई 2026 को उरई कोतवाली में दर्ज अपहरण के एक मामले में अपहृत व्यक्ति की सकुशल बरामदगी के लिए उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, सिपाही अशोक कुमार और सिपाही प्रदीप कुमार एक विशेष टीम के रूप में रवाना हुए थे। हरियाणा के नूंह जिले के तावड़ू क्षेत्र में उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी आगे चल रहे एक ट्रक से टकरा गई, जिससे इन चारों पुलिसकर्मियों की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई।
”कुछ ऋण ऐसे होते हैं जिन्हें कभी चुकाया नहीं जा सकता” – सीएम योगी
शहीदों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में कुछ ऋण ऐसे होते हैं जिन्हें कभी भी चुकाया नहीं जा सकता, और राष्ट्र का शहीदों के प्रति ऋण भी ठीक वैसा ही है। उन्होंने कहा, “जब हम उन वीर जवानों का स्मरण करते हैं जिन्होंने समाज की शांति, देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, तो हमारा मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाता है।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राष्ट्र की महानता इस बात से आंकी जाती है कि वह अपने इतिहास, अपने मूल्यों और उन लोगों के योगदान को कितना सम्मान देती है जिनके त्याग से वर्तमान सुरक्षित और भविष्य संभव हुआ है।
कानून-व्यवस्था के पुराने दौर को याद कर विपक्ष पर साधा कड़ा निशाना
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों के दौर की याद दिलाते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था की पुरानी तस्वीर को साझा किया। उन्होंने कहा कि एक वह समय था जब थानों की हालत बेहद दयनीय थी, जवानों के पास जंग लगी राइफलें होती थीं और अपराधी खुली जीप में बैठकर स्वचालित (Automatic) हथियार खुल्लमखुल्ला लहराते थे। उस दौर में पुलिस किसी भी दुर्दांत अपराधी पर हाथ डालने से पहले सौ बार सोचती थी, क्योंकि जरा सी कार्रवाई होने पर सत्ता के गलियारों से फोन आ जाते थे और अपराधी के बजाय ईमानदार अधिकारी के खिलाफ ही कार्रवाई कर दी जाती थी। उस समय पुलिस को अपराधियों को पकड़ने के बजाय हुक्मरानों के पालतू पशुओं को खोजने के लिए जंगलों में दौड़ाया जाता था।
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में विपक्ष और अपराधियों के हमदर्दों पर प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग आज पुलिस की सख्त कार्रवाई और एनकाउंटर नीति पर सवाल उठाते हैं, वे वही लोग हैं जो दुर्दांत माफियाओं और आतंकवादियों की मौत पर छाती पीटते हैं और उनकी कब्रों पर जाकर मातम मनाते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जब इन्हीं माफियाओं और अपराधियों की गोलियों से प्रदेश का कोई निर्दोष जवान शहीद होता है, तो उन अनाथ बच्चों के आंसू पोछने के लिए इन लोगों के पास एक बूंद भी संवेदना नहीं होती।
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