आगरा। प्रभु श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति, भ्रातृप्रेम और धर्म की विजय के भावों से सराबोर श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव का बुधवार को भव्य समापन हुआ। श्री मनःकामेश्वर ग्रामीण संस्थान, गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड पर चल रहे श्री मनः कामेश्वर रामलीला महोत्सव में मंगलवार को रावण वध के बाद बुधवार को विभीषण राज्याभिषेक, भरत मिलाप, पुष्पक विमान से अयोध्या वापसी और प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया।
समापन का सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया, जब हनुमान जी ने अपना सीना चीरकर उसमें विराजमान प्रभु श्रीराम और माता जानकी के दर्शन कराए। इस भक्तिमय दृश्य को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा परिसर जय श्रीराम तथा जय बजरंगबली के जयघोष से गूंज उठा।
रावण वध के बाद लंका में धर्म की स्थापना के संकल्प को पूरा करते हुए प्रभु श्रीराम ने विभीषण को लंका का राजा घोषित किया। इसके बाद लक्ष्मण जी ने विधि-विधान के साथ विभीषण का राज्याभिषेक किया। इस प्रसंग ने संदेश दिया कि सत्ता और सामर्थ्य का वास्तविक उद्देश्य न्याय, धर्म और लोककल्याण की स्थापना करना है।
इसके बाद भरत मिलाप का मार्मिक मंचन हुआ। चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण होने पर प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी की प्रतीक्षा कर रहे भरत का अपने आराध्य बड़े भाई से मिलन हुआ। दोनों भाइयों ने एक-दूसरे को गले लगाया तो श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। यह दृश्य त्याग, समर्पण और आदर्श भ्रातृप्रेम का अनुपम उदाहरण बना।
लंका विजय के बाद प्रभु श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण जी पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे। प्रभु के आगमन पर उल्लास और भक्तिभाव से परिपूर्ण वातावरण के बीच श्रीरामचंद्र जी के भव्य राज्याभिषेक का मंचन हुआ। प्रभु श्रीराम के सिंहासनारूढ़ होते ही रामराज्य की स्थापना का संदेश जन-जन तक पहुंचा। राज्याभिषेक के इस दृश्य ने श्रद्धालुओं को मर्यादा, न्याय और सुशासन के आदर्शों की याद दिलाई।
हनुमान जी ने सीना चीरकर कराए प्रभु श्रीराम के दर्शन
राज्याभिषेक के बाद प्रभु श्रीराम ने अपने प्रिय भक्तों को उपहार भेंट किए। इसी क्रम में उन्होंने हनुमान जी को मोतियों की माला प्रदान की। हनुमान जी माला के प्रत्येक मोती को तोड़कर उसमें प्रभु श्रीराम और माता जानकी को देखने लगे। यह देखकर विभीषण ने उनसे प्रश्न किया कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। उत्तर में हनुमान जी ने अपना सीना चीरकर दिखाया कि उनके हृदय में प्रभु श्रीराम और माता जानकी सदैव विराजमान हैं।
हनुमान जी के सीने में श्रीराम-जानकी के दर्शन का यह अद्भुत दृश्य रामलीला महोत्सव का भावपूर्ण चरम बना। इस प्रसंग ने संदेश दिया कि सच्ची भक्ति बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि हृदय में आराध्य के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण में निहित है।
समापन समारोह में महंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने प्रभु श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण जी और हनुमान जी सहित सभी स्वरूपों की आरती उतारी। इसके बाद मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने रामलीला महोत्सव में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, आयोजकों, कलाकारों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समापन अवसर पर ब्रज की रासलीला की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी कलाकारों द्वारा दी गई। राधा-कृष्ण की लीलाओं से सजी इस प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। रामलीला और रासलीला के समन्वय ने दर्शकों को ब्रज की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ा।
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