प्रयागराज/झांसी: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों के लिए शुक्रवार को वोट डाले जाने हैं, लेकिन मतदान से एक दिन पहले इलाहाबाद-झांसी स्नातक खंड की मतदाता सूची ने सियासी हलचल मचा दी है। सूची के कुछ पन्नों की तस्वीरें बुधवार देर शाम सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इनमें ‘राम ने यादव को मारा’, ‘मूर्खचंद यादव’, ‘मोहम्मद पागल रेहान’ और ‘टक्कर मारना’ जैसे नाम दर्ज दिखे। तस्वीरें फैलते ही राजनीतिक दलों से लेकर प्रशासन तक में खलबली मच गई।
मामला बढ़ता देख निर्वाचन आयोग को आधी रात के बाद सक्रिय होना पड़ा। आयोग ने झांसी के मंडलायुक्त से तत्काल जांच रिपोर्ट मांगी है। मंडलायुक्त इस निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी हैं। आयोग ने रात करीब सवा एक बजे अपने एक्स हैंडल पर जानकारी दी कि कुछ घंटे पहले सोशल मीडिया के जरिए सूची में अजीब नाम होने की सूचना मिली है। मंडलायुक्त को निर्देश दिए गए हैं कि वे मामले की जांच कर गुरुवार दोपहर तक रिपोर्ट सौंपें।
सूची में दर्ज बताए जा रहे नाम
वायरल तस्वीरों में दिख रहे नाम किसी को भी चौंका सकते हैं। इनमें कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं। जैसे भाग संख्या 81 के क्रमांक 696 पर नरेंद्र यादव के पिता का नाम ‘बीकाम’ लिखा है। पता ईडब्ल्यूएस आवास विकास कॉलोनी दर्ज है। भाग संख्या 15 के क्रमांक 82 पर मतदाता का नाम ‘मोहम्मद पागल रेहान’ और पिता का नाम मोहम्मद हाशिम है। पता दारागंज बताया गया है। भाग संख्या 189 के क्रमांक 1034 पर नाम ‘मूर्ख काली देवी’ दर्ज है। भाग संख्या 9 के क्रमांक 119 पर मतदाता का नाम ‘इरफान अली ने कहा’ लिखा है।
भाग संख्या 2 के क्रमांक 1205 पर ‘फैज अब्बास ने कहा’ दर्ज है। भाग संख्या 252 के क्रमांक 566 पर ‘खालिद अली ने कहा’ लिखा है। भाग संख्या 69 के क्रमांक 351 पर मतदाता और उसके पिता, दोनों का नाम ‘टक्कर मारना’ है।भाग संख्या 72 के क्रमांक 415 पर नाम ‘राम ने यादव को मारा’ और पिता का नाम ‘मूर्ख चंद यादव’ दर्ज है। पता रतौरा सरायइनायत लिखा है। भाग संख्या 133 के क्रमांक 768 पर रवि शर्मा के पिता का नाम ‘राम ने शर्मा को मारा’ लिखा है।
ये वही उदाहरण हैं जो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। हालांकि हमारा news पोर्टल इन नामों के मतदाता सूची में होने की पुष्टि नहीं करता। फिर भी आधी रात के बाद आयोग ने खुद जांच के आदेश दिए हैं, इसलिए माना जा रहा है कि उसे भी गड़बड़ी के संकेत मिले हैं।
सपा प्रत्याशी ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉक्टर मान सिंह यादव ने मतदाता पर्चियों में कथित गलतियों पर नाराजगी जताई और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक ऐसी त्रुटियां बेहद गंभीर चिंता का विषय हैं। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि लगता है जैसे किसी ने नशे की हालत में मतदाता सूची तैयार कर दी हो। उन्होंने इन गड़बड़ियों की शिकायत प्रशासन से की है और मामले पर ध्यान देने की मांग की है। उधर प्रशासन का कहना है कि मामूली त्रुटियों की वजह से किसी भी मतदाता को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस का हमला
यूपी कांग्रेस ने वोटर लिस्ट की तस्वीर साझा करते हुए आयोग पर निशाना साधा। पार्टी ने लिखा कि सूची में नाम की जगह ‘राम ने यादव को मारा’ और पिता के नाम की जगह ‘मुर्खचंद यादव’ दर्ज है। उसने सवाल किया कि आयोग शिक्षक और स्नातक चुनाव की मतदाता सूची बना रहा है या बेतुके वाक्यों की प्रतियोगिता करा रहा है।
कांग्रेस ने आगे पूछा कि निष्पक्ष चुनाव के बड़े दावों के बीच आयोग इस सूची की सच्चाई बताएगा या नहीं। उसने यह भी पूछा कि क्या जनता को मतदान से दूर रखने का कोई नया एजेंडा चलाया जा रहा है और क्या मतदाता अपना प्रतिनिधि चुनने से पहले अपना सही नाम खोजता फिरे। पार्टी ने इन सवालों का जवाब चुनाव आयोग और भाजपा से मांगा है।
भाजपा की भी शिकायत, डुप्लीकेट वोटरों का दावा
सिर्फ विपक्ष ही नहीं, भाजपा ने भी मतदाता सूची की खामियों पर आयोग का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर बोगस और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की है। चुनाव आयोग सम्पर्क विभाग के भाजपा प्रदेश संयोजक अखिलेश कुमार अवस्थी के अनुसार इलाहाबाद-झांसी खंड की सूची में बड़ी संख्या में बोगस मतदाता बना दिए गए हैं। उनका आरोप है कि इस क्षेत्र में प्रभावशाली स्नातक नेताओं ने एक ही नाम के दो से तीन-तीन वोट बनवा लिए हैं। भाजपा ने जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा को भी ज्ञापन सौंपा, जिस पर डीएम ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
भाजपा का यह भी कहना है कि स्नातक निर्वाचन में 24 वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति मतदाता नहीं बन सकता। इसके बावजूद झांसी और दूसरे जिलों की सूची में कई ऐसे वोटर हैं जिनकी जन्मतिथि 2001, 2002, 2003, 2004 और 2005 दर्ज है। पार्टी के अनुसार ये लोग किसी भी तरह स्नातक चुनाव में वोट डालने के पात्र नहीं हैं। भाजपा का आरोप है कि पहले भी ऐसे ही बोगस मतदाता सूची में जोड़े गए थे और उससे चुनाव प्रभावित हुआ था।
भाजपा महानगर अध्यक्ष संजय गुप्ता ने मांग की है कि मंडलायुक्त और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश देकर इन सभी बोगस मतदाताओं को वोट डालने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि यह सूचना सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों तक पहुंचे, ताकि 23 अक्तूबर को मतदान बिना किसी बाधा के हो सके। पार्टी ने अनुरोध किया है कि रिटर्निंग अधिकारी को दी जाने वाली पहली मतदाता सूची से इन सभी फर्जी नामों को तुरंत हटाया जाए। साथ ही जिन मतदाताओं की जन्मतिथि 2002 के बाद की है, उनके नाम रद्द किए जाएं।
डीएम मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि ज्ञापन मिल चुका है और डुप्लीकेट वोटरों की सूची की जांच कराई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवस्था ऐसी बनाई गई है कि कोई भी मतदाता दूसरी बार वोट नहीं डाल सकेगा।
जिलावार आंकड़े: कहां कितने दोहरे नाम
भाजपा नेताओं ने शिकायती पत्र में दावा किया है कि सूची में कुल 4397 डुप्लीकेट मतदाता हैं। जिलावार आंकड़े इस प्रकार बताए गए हैं:
प्रयागराज: 3163
कौशांबी: 320
जालौन: 179
झांसी: 178
बांदा: 140
फतेहपुर: 139
ललितपुर: 109
हमीरपुर: 81
चित्रकूट: 68
महोबा: 20
दो जगह वोट डाला तो होगा मुकदमा
डुप्लीकेट और बोगस वोटरों की शिकायतों के बीच प्रशासन ने नया आदेश जारी किया है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी उपमा पांडेय ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि अगर उनका नाम किसी दूसरे भाग या दूसरी तहसील की सूची में भी आ गया है, तो वे केवल अपने निर्धारित मतदान स्थल पर ही वोट डालें। एक से ज्यादा जगह मतदान करने वालों पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
भाजपा ने जिलाधिकारी को डुप्लीकेट वोटरों की सूची सौंपी थी, जिसके मिलान के लिए डीएम ने अफसरों को निर्देश दिए थे। शिकायत सही होने की आशंका को देखते हुए देर शाम उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने यह अपील जारी की।
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