आगरा के छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में आयोजित ‘वंडरफुल जैनिज्म-6’ के विशेष सत्र के दौरान संत शिरोमणि मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज ने युवाओं को बाहरी चमक-दमक और क्षणिक भौतिक उपलब्धियों के बजाय अपने चरित्र, संस्कारों और जीवन-मूल्यों से अपनी असली पहचान बनाने का अनमोल संदेश दिया। इस भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम में मुनिश्री 108 शील सागर महाराज और मुनिश्री 108 सुप्रभात सागर महाराज की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को जैन दर्शन, उच्च आध्यात्मिकता, जीवन के नैतिक मूल्यों और आत्म-विकास की दिशा से जोड़ना था। कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद संयुक्त धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने युवाओं को जीवन की वास्तविक सफलता और एक सशक्त व्यक्तित्व के निर्माण के सूत्र समझाए।
‘था’ नहीं, ‘थे’ बनकर जीने का संकल्प
अपने ओजस्वी उद्बोधन में मुनिश्री ने कहा कि दिन में सुबह और शाम का होना एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन सुबह से लेकर शाम तक के इस जीवन को सही और सार्थक ढंग से जीने की कला सीखना सबसे महत्वपूर्ण है। जीवन की हर सुबह नई उम्मीद और हर शाम अपने साथ खुशी लेकर आए, इसके लिए निरंतर पुरुषार्थ (प्रयास) बेहद जरूरी है।
उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और रावण का ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए युवाओं से सीधा सवाल किया कि क्या वे अपने जीवन के बाद दुनिया की जुबान पर अपने नाम के साथ ‘था’ सुनना चाहते हैं या फिर आदरसूचक ‘थे’ सुनना चाहते हैं। उन्होंने समझाया कि राम जैसा आदर्श जीवन जीने वाले महापुरुषों के लिए हमेशा सम्मान के साथ ‘थे’ शब्द का प्रयोग किया जाता है, जबकि इसके विपरीत रावण जैसे अहंकारी पात्र के संदर्भ में हमेशा ‘था’ कहा जाता है। इसलिए यह मनुष्य को खुद तय करना है कि दुनिया के जाने के बाद उसकी पीठ पीछे उसका नाम किस रूप में लिया जाए।
मुनिश्री ने स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के बीच का बारीक अंतर समझाते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत के नागरिकों को अभिव्यक्ति और आचरण की स्वतंत्रता जरूर मिली है, लेकिन इसका कतई यह अर्थ नहीं है कि नागरिक अपनी मनमानी करते फिरें। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बाहरी दिखावे, महंगे सामान और शारीरिक चमक-दमक के पीछे भागने के बजाय अपने भीतर के मानवीय व्यक्तित्व को मजबूत और सुंदर बनाएं।
बेटियों को केवल सुरक्षित नहीं, सक्षम बनाने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान दिल्ली से विशेष रूप से आईं प्रशिक्षक श्रीमती प्रिया जैन और ट्रेनर अंजना जैन ने एक विशेष कार्यशाला के माध्यम से उपस्थित युवतियों को आत्मविश्वासी, खुशहाल, मानसिक रूप से मजबूत, जागरूक, सकारात्मक और जीवन के हर मोड़ पर सही निर्णय लेने में सक्षम बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल बेटियों को सुरक्षित रखने की बात करना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें भीतर से इतना सक्षम और सशक्त बनाना जरूरी है ताकि वे जीवन की हर बड़ी चुनौती का डटकर, मजबूती और प्रसन्नता के साथ सामना कर सकें।
इस संपूर्ण कार्यक्रम का सफल संचालन सतेंद्र जैन साहूला द्वारा किया गया। इस अवसर पर भारतीय जैन संगठन (BJS) उत्तर प्रदेश के राज्य महामंत्री सुरेंद्र कुमार जैन, राज्य चेयरमैन एवं कार्यक्रम संयोजक अंकेश जैन, जिला अध्यक्ष शैलेंद्र जैन और कुमार मंगलम सहित संगठन के तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा ‘श्रुत मंथन वर्षायोग समिति’ की ओर से मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुकेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल), आशीष जैन (बाबा), सचिन जैन (तार), आशु (वी.के), रोहित जैन, नितिन, सनी, अनिकेत, दीपक जैन और मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित समस्त मंडल तथा बड़ी संख्या में सकल जैन समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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