​’नमस्ते आगरा’ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन: देश के दिग्गज कवियों की कविताओं में गूंजा स्वाभिमान, समरसता और इंसानियत का संदेश

PRESS RELEASE

आगरा। किसी ने आंसुओं की अहमियत बताकर जिंदगी के दर्द को शब्द दिए तो किसी ने सम्राटों के स्वाभिमान और बुद्ध के विचारों से समाज को आईना दिखाया। कहीं हास्य-व्यंग्य की फुहार बरसी तो कहीं ओजस्वी रचनाओं ने श्रोताओं में उत्साह भर दिया। मौका था शनिवार को यूथ हॉस्टल, एमजी रोड पर आयोजित ‘नमस्ते आगरा’ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक संध्या का। देश के विभिन्न शहरों से आए कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से साहित्यिक माहौल को यादगार बना दिया।

मुख्य अतिथि मेयर हेमलता दिवाकर ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का संचालन राजेश प्रतापगढ़ी ने किया। कवियों ने सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना, स्वाभिमान, सांस्कृतिक विरासत और समरसता जैसे विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

डॉ. त्रिमोहन शाक्य ‘तरल’ ने अपनी चार पंक्तियों में भावनाओं की गहराई को इस तरह अभिव्यक्त किया अगर आँसू नहीं होते हमारे दिल का क्या होता, पिघलता ही नहीं पत्थर ग़मों का जो जमा होता, प्रेमचंद शाक्य (मैनपुरी) ने बुद्ध के विचारों और सामाजिक चेतना को अपनी रचना में पिरोते हुए कहा कि कंकड़ पत्थर शूल हटाकर राह सदा नीकी चलना, बुद्ध नहीं बन सकते हो तो अंगुलिमाल नहीं बनना।

उन्होंने आम्रपाली और वैशाली के प्रसंगों के माध्यम से इतिहास और सामाजिक व्यवस्था पर भी विचार रखे। हरिओम सिंह ‘विमल’ ने स्वाभिमान और पूर्वजों के गौरव को अपने शेरों में कुछ यूं बयां किया रगड़ने नाक अपनी हम किसी दर पर नहीं जाते, रहेगी आन कायम जब तलक हम मर नहीं जाते। डॉ. निर्दोष कुमार ‘प्रेमी’ ने अपने चुटीले अंदाज में श्रोताओं को गुदगुदाया कि रुस्तम हैं आप और हैं आदिल अली ज़ुबैर, हमने सुना है आप कि रखते हैं सबकी ख़ैर।

इसके अलावा डॉ. लालाराम मौर्य ‘पल्लव’ (कासगंज), डॉ. राधा शाक्य (कानपुर), डॉ. नरेंद्र कुमार ‘संगम’ (मैनपुरी), रामानंद सागर (अयोध्या), डॉ. पुष्पा पल्लवी (कासगंज), डॉ. अजय अटल (कासगंज), हरिओम सिंह ‘विमल’ (इटावा), विवेक कुशवाह (धौलपुर), मंजू शाक्य (दिल्ली), हर्ष कुमार शाक्य (दिल्ली), विनीता कुशवाह ‘महक गोंडवी’ (अयोध्या), रवि कुशवाह (ललितपुर), शिवशंकर कुशवाह ‘कुशाग्र’ (आगरा), राजेश प्रतापगढ़ी (प्रतापगढ़), अयोध्या प्रसाद मौर्य (पंजाब), शिव भानु कृष्णा (अमेठी), रंजीता ‘समृद्धि कुशवाह’ (प्रयागराज), दीपशिखा, अनिल कुमार ‘निलय’ (चित्रकूट), नीलेश मौर्य ‘निडर’ (फतेहपुर), रीता सिंह (आगरा), नाहर शाक्य (आगरा), धनंजय कुशवाह (बिहार) आदि कवियों ने काव्य पाठ किया।

समापन पर राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव रत्न मौर्य ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने रविवार, 1 नवंबर को सूर सदन प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले ‘नमस्ते आगरा स्वर्णिम भविष्य सम्मेलन’ के अंतर्गत ‘प्रबुद्ध भारत महासंसद-2026 : राष्ट्रीय महाविमर्श, समालोचन एवं भावी दिशा का महा संकल्प’ की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इसमें शिक्षा, सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण, युवा नेतृत्व, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार-मंथन होगा। कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्थाएं गया प्रसाद मौर्य ‘रजत’ सहित टीम नमस्ते आगरा ने संभालीं।

Dr. Bhanu Pratap Singh