कानपुर (संवाददाता)। कानपुर चिड़ियाघर (कानपुर जू) में वन्यजीवों की लगातार और रहस्यमयी मौतों के सिलसिले ने वन विभाग और चिड़ियाघर प्रशासन की नींद उड़ाकर रख दी है। पिछले महज 40 दिनों के भीतर यहां 9 दुर्लभ वन्यजीवों की जान जा चुकी है। शुरुआती जांच और चिकित्सकीय आकलन के आधार पर वन्यजीवों की मौतों के पीछे हीमोप्रोटोजोआ (Hemoproteus) संक्रमण की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
पशु विशेषज्ञों के मुताबिक, यह घातक संक्रमण मक्खी या परजीवियों के काटने से जानवरों के खून में तेजी से फैलता है। हालांकि, मौतों के वास्तविक और अंतिम कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों की गहन जांच और मेडिकल लैब रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।
इसी कड़ी में हाल ही में दम तोड़ने वाले एक तेंदुए की मौत को लेकर भी कई चिकित्सकीय पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, इलाज के दौरान तेंदुए के शरीर पर मौजूद घाव बार-बार ताजा हो रहे थे, जिससे शरीर में संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई थी।
प्राथमिक जांच में मौत की वजह सेप्टीसीमिया (Septicemia) और कार्डियक अरेस्ट (हार्ट अटैक) मानी जा रही है। मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए तेंदुए के शव और विसरा को विस्तृत पैथोलॉजिकल जांच हेतु प्रसिद्ध भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली भेजने की प्रशासनिक तैयारी की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असल वजह उजागर होगी।
संभावित खतरे को देख 26 काले हिरणों का आपात वैक्सीनेशन
लगातार हो रही मौतों के बाद बैकफुट पर आए चिड़ियाघर प्रशासन ने संभावित संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए एहतियातन बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। चिड़ियाघर में मौजूद अन्य बेजुबानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष वैक्सीनेशन अभियान चलाया गया है। इसके तहत अब तक 26 काले हिरणों (Blackbucks) को सुरक्षा कवच प्रदान करते हुए वैक्सीन लगाई जा चुकी है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि यह अज्ञात या संभावित संक्रमण दूसरे बाड़ों में बंद वन्यजीवों तक न फैल सके।
जू प्रशासन की स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
महज 40 दिनों के अंतराल में 9 वन्यजीवों की असमय मौत ने कानपुर जू की स्वास्थ्य निगरानी (Health Surveillance), स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। चिंताजनक बात यह भी है कि मृत जानवरों में अलग-अलग प्रजातियों के जीव शामिल हैं। ऐसे में वन्यजीव विशेषज्ञों के सामने यह गुत्थी सुलझाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है कि क्या इन सभी मौतों के पीछे कोई एक ही साझा संक्रमण जिम्मेदार है या फिर हर मामले की वजह अलग-अलग है।
फिलहाल, मौतों के कारणों पर से पर्दा मेडिकल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उठ सकेगा। चिड़ियाघर प्रशासन और वेटरनरी डॉक्टरों की निगाहें अब लैब रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि संक्रमण का खतरा कितना भयावह है और वन्यजीवों को बचाने के लिए आगे क्या सख्त कदम उठाने की दरकार होगी।
- प्यार, धोखा और आर्थिक शोषण की दर्दनाक दास्तान: शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म? आगरा से ट्रांसफर जीरो एफआईआर पर 40 दिन बाद भी उत्तराखंड पुलिस मौन - November 5, 2026
- आगरा में बाजरे की बोरियों की आड़ में 30 लाख की अवैध शराब जब्त: मलपुरा पुलिस ने राजस्थान चुनाव में खपने जा रही 201 पेटी पकड़ी - November 5, 2026
- आगरा में भीषण सड़क हादसा: ससुराल जा रहे दामाद और सास की दर्दनाक मौत, महुआखेड़ा के पास अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर - November 5, 2026