सोमवार को तालिबान नेताओं और यूरोपीय संघ के विशेष दूतों और अन्य सात देशों के उच्चाधिकारियों के बीच बैठक हुई.
अफ़ग़ानिस्तान को अपने नियंत्रण में लेने के बाद यह पहला मौक़ा है जब तालिबान के सदस्य पश्चिमी देशों के अधिकारियों से मुलाक़ात कर रहे हैं. तीन दिवसीय बैठक की पहली मुलाक़ात सोमवार को हुई. हालांकि इससे पहले तालिबान सदस्यों ने कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से भी मुलाक़ात की थी.
टोलो न्यूज़ ने विदेश मंत्रालय के हवाले से लिखा है कि सोमवार को अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के अंतरिम विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्ताक़ी और उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने ओस्लो में यूरोपीय संघ और सात देशों के दूतों से मुलाक़ात की.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल क़हर ने ट्विटर पर बैठक की पुष्टि करते हुए लिखा है कि प्रतिनिधिमंडल ने यूरोपीय संघ के विशेष दूतों और अमेरिका, ब्रिटेन, नॉर्वे, जर्मनी, इटली, फ़्रांस और क़तर के उच्चाधिकारियों के साथ मुलाक़ात की.
“यह बैठक अर्थव्यवस्था, मानवीय सहायता, सुरक्षा, सेंट्रल बैंक, स्वास्थ्य और दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित थी.”
अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत थॉमस वेस्ट ने इससे पहले रविवार को इस संबंध में कई ट्वीट किए थे.
अपने ट्वीट में उन्होंने स्पष्ट किया था कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश अफ़ग़ानिस्तान के मानवीय संकट से निपटने और उसे दूर करने के लिए रास्ते तलाश रहे हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की बैठकें अफ़ग़ानिस्तान की मौजूदा समस्याओं का समाधान तलाशने में मददगार साबित हो सकती हैं.
– एजेंसियां
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